पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. सोमवार (13 अप्रैल, 2026) को कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपीलेट ट्रिब्यूनल से संपर्क करने का निर्देश दिया है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता (कुरैशा यास्मीन और अन्य) पहले ही अपीलेट ट्रिब्यूनल से संपर्क कर चुके हैं… हमारी राय में, याचिका में व्यक्त आशंकाएं समय पूर्व हैं. याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से नाम हटाए हैं, और इसके खिलाफ दायर अपील पर समय पर सुनवाई नहीं की जा रही.
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ अपील पर निर्णय लेने के लिए हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों की अध्यक्षता में 19 ट्रिब्यूनल्स का गठन किया है. चुनाव आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट डी एस नायडू ने कोर्ट को सूचित किया कि वर्तमान में लगभग 30 से 34 लाख अपील लंबित हैं.
बेंच ने कहा, ‘हर ट्रिब्यूनल के पास अब निपटाने के लिए एक लाख से अधिक अपील हैं.’ याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि निर्वाचन आयोग संबंधित न्यायिक अधिकारियों के समक्ष आवश्यक आदेश प्रस्तुत करने में विफल रहा है और मतदाता सूची के लिए अंतिम तिथि को बढ़ाया जाना चाहिए.
वकील ने कहा, ‘अगर मुझे बहस करने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो फिर इसका क्या फायदा? क्या इन अपील का फैसला एक निश्चित समयसीमा के भीतर होगा या इन्हें बस आगे बढ़ाया जाता रहेगा?.’ सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता का जिक्र करते हुए कहा कि मतदान का अधिकार सिर्फ एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र का एक भावनात्मक स्तंभ है.
जस्टिस बागची ने कहा, ‘जिस देश में आपका जन्म हुआ है, वहां वोट देने का अधिकार न केवल संवैधानिक है, बल्कि भावनात्मक भी है. यह लोकतंत्र का हिस्सा होने और सरकार चुनने में मदद करने से जुड़ा है. हमें इस अधिकार की रक्षा करने की जरूरत है. हम आगामी विधानसभा चुनाव की आंधी, गहमागहमी और शोर-शराबे में भ्रमित नहीं हो सकते हैं.’ हालांकि, उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल्स पर निर्णयों के लिए समयसीमा निर्धारित करके अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जा सकता.
उन्होंने कहा, ‘हमें उचित प्रक्रिया के अधिकारों की रक्षा करनी होगी. वोटर को दो संवैधानिक प्राधिकरणों के बीच फंसा हुआ नहीं होना चाहिए.’ उन्होंने यह भी कहा कि इस स्तर पर चुनाव प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी. जस्टिस बागची ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अपील की प्रक्रिया और प्रारूप पहले ही तैयार कर लिया था, जिसकी सोमवार से शुरुआत हो गई.
बेंच ने कहा, ‘जब तक बड़ी संख्या में मतदाताओं को मतदान से बाहर नहीं कर दिया जाता या इससे चुनाव पर महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ता… तब तक चुनाव रद्द नहीं किया जा सकता.’ कोर्ट ने कहा कि न्यायिक हस्तक्षेप का उद्देश्य चुनावों को बढ़ावा देना है, न कि उन्हें रोकना. मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ताओं को अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष अपने सभी कानूनी उपायों का उपयोग करना चाहिए. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा और वोटों की गिनती चार मई को होगी.
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