दिल्ली में होटल, ढाबा, अस्पताल, स्कूल और प्रवासी मजदूरों के लिए कमर्शियल कुकिंग गैस यानी LPG की सप्लाई में बड़ा बदलाव आ गया है. सरकार ने 26 मार्च 2026 को नई पॉलिसी जारी की. खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि अब आवंटन पिछले तीन महीनों की औसत खपत के आधार पर होगा और रोजाना सप्लाई 20% से बढ़ाकर 50% कर दी गई है. क्या है ये नई नीति? कौन-कौन से सेक्टर को फायदा? प्रवासी मजदूरों के लिए क्या खास? आइए एक्सप्लेनर में जानते हैं…
सवाल 1: दिल्ली सरकार ने कमर्शियल LPG सिलेंडर की नीति में आखिर क्या बदलाव किया है?
जवाब: मनजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को संशोधित नीति घोषित की. अब कमर्शियल LPG सिलेंडरों का आवंटन उपभोक्ताओं के पिछले तीन महीनों की औसत खपत के आधार पर तय किया जाएगा. पहले यह औसत खपत का 20% था, अब इसे 50% कर दिया गया है. रोजाना 1,800 सिलेंडर (19 किलो के बराबर) की जगह अब 4,500 सिलेंडर उपलब्ध होंगे.
आसान शब्दों में कहें तो आपने पिछले तीन महीनों में कितने सिलेंडर इस्तेमाल किए, उन सब का कैलकुलेशन किया जाएगा. फिर इसी आधार पर आपको अगला सिलेंडर मिलेगा.
सवाल 2: ये बदलाव क्यों किया गया?
जवाब: पश्चिम एशिया में चल रही जंग की वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 4 मार्च 2026 को कमर्शियल LPG सप्लाई 20% तक सीमित कर दी थी. अब स्थिति सामान्य होने पर सरकार ने इसे बढ़ा दिया. मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी जरूरी सेवाओं और वैध गैस कनेक्शन न रखने वाले प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता दी जाएगी.

सवाल 3: कुल कितने सिलेंडर रोज बांटे जाएंगे और कैसे बांटे जाएंगे?
जवाब: रोजाना कुल 4,500 सिलेंडर (19 किलो के बराबर) बांटे जाएंगे. इनमें से:
- मौजूदा 20% आवंटन: 1,800 सिलेंडर
- एक्स्ट्रा 10% आवंटन: 900 सिलेंडर
- एक्स्ट्रा 20% सेक्टरल आवंटन: 1,800 सिलेंडर
इसके लिए दो तरीके निकाले गए हैं. पहले तरीके में 7 कैटेगरी रखी गई हैं, जिन्हें 5 किलोग्राम सिलेंडर मिलेगा. वहीं दूसरी ओर 7 कैटेगरी को छोड़कर 19 किलोग्राम सिलेंडर का आवंटन होगा.
- 19 किलो सिलेंडर (कैटेगरी 7 को छोड़कर) के आवंटन में IOCL 58%, BPCL 27%, HPCL 15% का हिस्सा रहेगा.
- 5 किलो सिलेंडर (केवल कैटेगरी 7 के लिए) के लिए IOCL 32.5%, HPCL 32%, BPCL 35.5% के हिस्से से गैस ली जाएगी.
सवाल 4: 7 कैटेगरी में कैसे बंटेगा आवंटन?
जवाब: केंद्र सरकार ने सिलेंडर आवंटन के लिए व्यवस्थित कैटेगरी बनाई है.

सवाल 5: दो प्राथमिकता वाले सेक्टर कौन-से हैं?
जवाब: कैटेगरी 1 और कैटेगरी 7. कैटेगरी 1 को अपनी पूरी जरूरत के हिसाब से 100% सिलेंडर मिलेंगे. अगर जरूरत ज्यादा पड़ी तो कैटेगरी 3 (होटल-ढाबा) से कटौती करके इन्हें दिया जाएगा. कैटेगरी 7 के तहत प्रवासी मजदूरों को रोज 180 सिलेंडर (19 किलो समकक्ष, यानी करीब 684 सिलेंडर 5 किलो के) ‘प्रोटेक्टेड सोशल अलोकेशन’ के रूप में मिलेंगे.
सवाल 6: प्रवासी मजदूरों को 5 किलो सिलेंडर कैसे मिलेगा?
जवाब: सिर्फ लिखित अनुरोध पर. उपभोक्ता को अपना आधिकारिक लेटरहेड पर आवेदन डिस्ट्रीब्यूटर को देना होगा. डिस्ट्रीब्यूटर सिस्टम जनरेटेड इनवॉइस या कैश मेमो जारी करेगा और डिलीवरी का एक्नॉलेजमेंट लेगा. डायवर्शन रोकने के लिए कंपनियां मजदूरों का पूरा रिकॉर्ड (आधार कार्ड समेत) रखेंगी.
सवाल 7: सिलेंडर डिलीवरी के अन्य नियम क्या हैं?
जवाब: सभी कमर्शियल उपभोक्ताओं को OMC के साथ रजिस्टर होना जरूरी है या इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के पास PNG कनेक्शन के लिए आवेदन पूरा करना होगा (PNG नेटवर्क हो या न हो). सप्लाई कम होने पर FIFO (पहले आए, पहले पाएं) तरीके से बांटे जाएंगे. कंपनियों को रोज सुबह 11 बजे तक कैटेगरी-वार रिपोर्ट विभाग को भेजनी होगी.
मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों में न आएं. उन्होंने कहा, ‘स्थिति पूरी तरह सामान्य है. OMC के माध्यम से सप्लाई सुचारू रूप से चल रही है. लोगों से मेरी गुजारिश है कि अफवाहें न फैलाएं.’
ये बदलाव दिल्ली के होटल-ढाबा, अस्पताल, स्कूल और मजदूरों के लिए राहत भरी खबर है. अब औसत खपत देखकर सिलेंडर मिलेंगे, कोई भी सेक्टर बिना वजह परेशान नहीं होगा. पॉलिसी लागू होते ही सप्लाई बढ़ गई है. अगर आपके पास भी कमर्शियल कनेक्शन है तो अपने डिस्ट्रीब्यूटर से नई व्यवस्था की जानकारी जरूर लें.



