तेलांगना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण संकट का उदाहरण देते हुए पर्यावरण संरक्षण और समय पर कार्रवाई की अहमियत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली, जहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, संसद और सुप्रीम कोर्ट जैसे देश के सर्वोच्च संस्थान मौजूद हैं. आज प्रदूषण के कारण गंभीर हालात से जूझ रही है. मुख्यमंत्री मंचिरेवु में मुसी नदी के किनारे मछलीश्वर स्वामी और ओंकारेश्वर स्वामी मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए आधारशिला समारोह के दौरान यह बात कही.
उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि दिल्ली की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि सरकार को खुद ही सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं. वाहनों पर रोक लगाई जा रही है, स्कूलों को बंद किया जा रहा है और सरकारी दफ्तरों में छुट्टियों की घोषणा करनी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि समय पर पर्यावरणीय कदम न उठाने का परिणाम है.
रेवंत रेड्डी ने विशेष रूप से यमुना नदी के बढ़ते प्रदूषण का उल्लेख करते हुए कहा कि नदी की खराब हालत ने पूरे शहर के पर्यावरण को प्रभावित किया है. उन्होंने कहा कि जब एक राजधानी शहर इस तरह प्रदूषण की चपेट में आ सकता है, तो अन्य शहरों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के शीर्ष नेतृत्व और संसाधन दिल्ली में मौजूद हैं, तब भी प्रदूषण को नियंत्रित क्यों नहीं किया जा सका. मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से आत्ममंथन करने की अपील करते हुए कहा कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना जरूरी है.
प्रदूषण के कारण दिल्ली में निवेश पर असर-रेवंत रेड्डी
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में निवेश पर असर पड़ रहा है. खराब पर्यावरणीय हालात के चलते कई निवेशक अन्य राज्यों और देशों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं. रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि तेलंगाना जैसे राज्यों को दिल्ली के अनुभव से सीख लेनी चाहिए और समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर अभी से पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में अन्य शहरों को भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. अंत में, उन्होंने कहा कि संतुलित विकास ही देश की प्रगति का आधार है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.



