Saturday, October 17, 2026
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ऑनलाइन विज्ञापनों से कैसे जासूसी कर रहा था इजरायल? रिसर्च में खुलासा

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  • सिटिजन लैब ने विज्ञापनों द्वारा जासूसी करने वाली Discover Tech का खुलासा किया।
  • यह कंपनी लाखों वेबसाइटों, ऐप्स पर करोड़ों जासूसी विज्ञापन चलाती थी।
  • पेंटागन, संयुक्त राष्ट्र, अल-जजीरा समेत वैश्विक संस्थाएँ जासूसी का शिकार बनीं।
  • खुलासे के बाद गूगल सहित प्रमुख टेक कंपनियों ने कार्रवाई की।

इंटरनेट चलाते वक्त किसी ऐप पर काम करते हुए जब स्क्रीन पर किसी चीज का विज्ञापन दिखता है. तो हम उसे नार्मल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि यही मामूली दिखने वाले विज्ञापन आपकी जासूसी कर रहे हों? साइबर सेफ्टी पर काम करने वाले रिसर्च ग्रुप Citizen Lab और Confiant की एक नई रिसर्च ने इंटरनेट की दुनिया में हड़कंप मचा दिया है. 

इस खुलासे के मुताबिक इजरायल की डिजिटल विज्ञापन एजेंसी Discover Tech ने ऑनलाइन विज्ञापनों की आड़ में दुनिया भर में जासूसी का एक बहुत बड़ा जाल बिछा रखा था. यह कंपनी रोजमर्रा के सामानों के विज्ञापन दिखाकर लोगों को ट्रैक कर रही थी और उनके फोन, कंप्यूटर में चुपके से जासूसी सॉफ्टवेयर यानी स्पाइवेयर डाल रही थी. इस कंपनी के तार इजरायल की कुख्यात और अमेरिका द्वारा ब्लैकलिस्टेड स्पाइवेयर फर्म Candiru से जुड़े मिले हैं. जिसका खतरनाक सॉफ्टवेयर इन विज्ञापनों के जरिए डिवाइस में प्लांट किया जाता था.

रोजाना चलते थे एक करोड़ जासूसी विज्ञापन

रिसर्च में सामने आया है कि Discover Tech अपने विज्ञापन दिखाने के लिए Google, Comcast और रूस के Yandex जैसे दुनिया के सबसे बड़े एड प्लेटफॉर्म्स के नेटवर्क का इस्तेमाल करती थी. Citizen Lab के मुताबिक इस इजरायली कंपनी के विज्ञापन दुनिया भर की 1.20 लाख से ज्यादा वेबसाइट्स और 75 हजार मोबाइल ऐप्स पर चल रहे थे. सबसे खतरनाक बात यह थी कि शिकार बनने के लिए यूजर का विज्ञापन पर क्लिक करना भी जरूरी नहीं था.

जैसे ही कोई इंसान ऐसी किसी वेबसाइट या ऐप को खोलता और स्क्रीन पर विज्ञापन लोड होत  Discover Tech उसे ट्रैक कर लेती थी.  Confiant के सह-संस्थापक जेरोम डंगू के अनुसार यह कंपनी रोजाना कम से कम एक करोड़ विज्ञापन चलाती और Cookie Matching तकनीक से करोड़ों लोगों का पीछा कर रही थी.

ऑनलाइन विज्ञापनों से कैसे जासूसी कर रहा था इजरायल? रिसर्च में खुलासा

पेंटागन, संयुक्त राष्ट्र और अल-जजीरा से लेकर फलस्तीन तक

इस जासूसी नेटवर्क ने सिर्फ आम इंटरनेट यूजर्स को ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले संगठनों को भी अपनी जद में ले लिया था. शोधकर्ताओं ने मुताबिक कि इन जासूसी विज्ञापनों की पहुंच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन, संयुक्त राष्ट्र यानी यूनाइटेड नेशन्स, नाटो, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और यूरोपीय आयोग के साथ-साथ दिग्गज टेक कंपनी Nvidia के नेटवर्क तक थी. 

सिटिजन लैब ने अपनी जांच में पुष्टि की है कि साल 2024 से 2025 के बीच इन्हीं विज्ञापनों के जरिए भेजे गए स्पाइवेयर से कतर के मशहूर मीडिया संस्थान Al Jazeera के 45 विंडोज डिवाइसेस को निशाना बनाकर हैक किया गया था. 

वहीं फलस्तीनी इलाकों में तो इन विज्ञापनों की भरमार थी. वहां की लगभग हर वेबसाइट पर Discover Tech के विज्ञापन मौजूद थे जिससे इस इजरायली फर्म को पूरे क्षेत्र की डिजिटल गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने में मदद मिल रही थी और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी.

ऑनलाइन विज्ञापनों से कैसे जासूसी कर रहा था इजरायल? रिसर्च में खुलासा

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खुलासे के बाद हरकत में आईं टेक कंपनियां

इस सनसनीखेज खुलासे के सामने आने के बाद पूरी दुनिया में इंटरनेट सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और बड़ी टेक कंपनियों ने तुरंत एक्शन लिया है. Google ने Citizen Lab और Confiant की जांच में सहयोग करते हुए नीतियों का बार-बार उल्लंघन करने के आरोप में Discover Tech को अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इसी तरह Comcast की एड-टेक कंपनी बीजवैक्स ने भी अपने प्लेटफॉर्म से इस इजरायली फर्म की छुट्टी कर दी है. 

उधर यूरोपीय डिजिटल मार्केटिंग संगठन ने भी ऑडिट के बाद Discover tech को अपने स्वीकृत वेंडर्स की लिस्ट से निलंबित कर दिया है. विज्ञापनों के जरिए होने वाली यह जासूसी अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है. इससे पहले पेंटागन ने भी चिंता जताई थी कि युद्ध क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को एड-टेक कंपनियों के लोकेशन डेटा के जरिए निशाना बनाया गया था जिसके बाद कई सैन्य डिवाइसों पर एड ट्रैकिंग बंद कर दी गई है.

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