Friday, April 10, 2026
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क्या ईरान भारतीय जहाजों से भी वसूल रहा पैसा? होर्मुज पार करने के लिए बाकी देश दे रहे 20 लाख डॉलर, विदेश मंत्रालय ने क्या बताया

अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  से जहाज के गुजरने को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है. ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर वसूल रहा है. भारत इस रास्ते से स्वतंत्र और सुरक्षित आवागमन का रुक अपनाया है. पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता में यह विवाद का मुद्दा बना हुआ है.

होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से कितना वसूल रहा ईरान?

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) को बताया कि होर्मुज पार करने वाले कुछ जहाजों से ट्रांजिट शुल्क के रूप में 2 मिलियन डॉलर वसूलना ईरान की ताकत को दर्शाता है. 28 फरवरी को ईरान पर शुरू हुए हमले के बाद से ये रास्ता तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों के लिए बंद हो गया.

क्या भारत से भी पैसे वसूल रहा ईरान?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अस्थायी सीजफायर की घोषणा के बाद भारत ने कहा कि वह ईरान से हताहतों की संख्या को लेकर बात नहीं किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट पर टोल लगाए जाने की खबरें हमें भी मिली है. भारत इस रास्ते से जहाज के स्वतंत्र और सुरक्षित गुजरने की मांग जारी रखता है. हमने पहले भी यही बातें कही है.’ 

सीजफायर से पहले भी ईरान की ओर से शु्ल्क वसूलने की खबरें आई थी. वहीं ईरान ने भारत को मित्र देश के रूप में इस रास्ते से आवागमन की अनुमति दी है. ऐसे में सवाल है कि क्या भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपने जहाज निकालने के लिए ईरान को ट्रांजिट शुल्क दिया था. केंद्र सरकार ने इस बात से इनकार किया है कि ईरान को ऐसा कोई भुगतान किया गया था.

भारत सुरक्षित शिपिंग की मांग जारी रखेगा: जायसवाल 

रणधीर जायसवाल ने 9 अप्रैल को कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट से जहाज गुजरने के बदले पैसे को लेकर हमारे और ईरान के बीच कोई बात नहीं हुई है. भविष्य में अगर ऐसी स्थिति बनती है तो उस समय इस पर निर्णय लिया जाएगा. हम होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रोक-टोक के और सुरक्षित शिपिंग की मांग जारी रखेंगे.’ इस रास्ते से भारतीय ध्वज वाले 8 एलपीजी टैंकर गुजरे हैं. भारत अपनी तेल और गैस आपूर्ति के लिए मिडिल ईस्ट पर अत्यधिक निर्भर है, जिसमें से 90 फीसदी तक आयात किया जाता है.

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