Thursday, April 9, 2026
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Explained: बंगाल में बीजेपी ने एक भी मुस्लिम को नहीं दिया टिकट, 2021 के 8 कैंडिडेट से शून्य का सफर क्यों? समझें खेला

8 अप्रैल 2026 को बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपनी अंतिम उम्मीदवार सूची जारी की. इसमें 294 सीटों में से घोषित सभी उम्मीदवारों में एक भी मुस्लिम नाम नहीं था. पार्टी ने 8 अप्रैल को कोलकाता पोर्ट सीट से राकेश सिंह को अंतिम उम्मीदवार बनाया और सूची पूरी कर ली, जबकि बीते चुनाव में मुस्लिम बीजेपी कैंडिडेट्स थे. तो क्या यह मान लें कि बंगाल के बीजेपी मुसलमानों को मुस्लिम पर भरोसा नहीं रहा? एक्सप्लेनर में समझते हैं बीजेपी का बंगाल जादू…

सवाल 1: बंगाल के पिछले चुनाव में बीजेपी के कितने मुस्लिम उम्मीदवार थे? नतीजा क्या था?
जवाब: पश्चिम बंगाल में पिछली बार विधानसभा चुनाव 2021 में हुए थे. तब बीजेपी ने 294 सीटों में से सिर्फ 8 पर मुसलमान उम्मीदवार उतारे थे. ये ज्यादातर दिनाजपुर, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में थे. लेकिन नतीजे चौंकाने वाले आए. 8 मुस्लिम कैंडिडेट्स में एक भी नहीं जीता. मुस्लिम बहुल 112 सीटें तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जीतीं थीं. TMC को 75% वोट मिले थे, जबकि बीजेपी को सिर्फ 7%.

मालदा के सुजापुर में एक उम्मीदवार को 366 बूथों में से 244 पर सिंगल डिजिट वोट मिले, 19 बूथों पर 0 वोट. बीजेपी ने पूरे बंगाल में 77 सीटें जीतीं, लेकिन मुस्लिम इलाकों में प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था.

इससे पहले 2016 में बीजेपी ने सिर्फ 3 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे. इनमें से भी कोई कामयाब नहीं हुआ. 2016 में बीजेपी को सिर्फ 3 सीटें मिली थीं. यानी ट्रेंड साफ है कि हर बार संख्या घटती गई.

 

बीते 10 सालों में बंगाल में बीजेपी का एक भी मुस्लिम कैंडिडेट चुनाव नहीं जीता
बीते 10 सालों में बंगाल में बीजेपी का एक भी मुस्लिम कैंडिडेट चुनाव नहीं जीता

सवाल 2: तो इस बार चुनाव में बीजेपी की रणनीति क्या है?
जवाब: बीजेपी की रणनीति अब पूरी तरह ‘विनेबिलिटी फर्स्ट’ पर बेस्ड है. पार्टी को लगता है कि मुस्लिम उम्मीदवारों को बीजेपी के टिकट पर मुस्लिम वोटरों का समर्थन नहीं मिलता. बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 33% है, लेकिन मुस्लिम वोटरों का बड़ा हिस्सा TMC के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है.

बीजेपी अब हिंदू वोट को 100% एकजुट करने पर फोकस कर रही है. ‘अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’ का मुद्दा उठाकर और विकास, सुरक्षा, सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जोर देकर हिंदू आबादी को कंसोलिडेट करना चाहती है. अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता भी कह रहे हैं कि समुदाय की सेवा उम्मीदवार उतारने से नहीं, बल्कि विकास और सुरक्षा से जुड़ी है.

बंगाल बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अली हुसैन ने साफ कहा, ‘पार्टी का मानना है कि किसी समुदाय के लिए जिम्मेदारी सिर्फ उस समुदाय से उम्मीदवार उतारने पर निर्भर नहीं करती.’ 

2021 में मुस्लिम उम्मीदवारों की हार के बाद पार्टी ने यह निष्कर्ष निकाला कि टिकट देककर भी वोट नहीं मिलता, इसलिए अब इस रास्ते से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया गया.

सवाल 3: बंगाल के 2026 चुनाव में अन्य पार्टियों ने कितने मुस्लिम कैंडिडेट्स उतारे?
जवाब: बीजेपी के मुकाबले अन्य सभी पार्टियों ने मुस्लिम कैंडिडेट्स पर दांव खेला है:

  • कांग्रेस: सबसे ज्यादा 78 मुस्लिम उम्मीदवार.
  • TMC: 47 मुस्लिम उम्मीदवार.
  • लेफ्ट फ्रंट: 26 मुस्लिम उम्मीदवार.
  • AIMIM और AJUP गठबंधन: मुस्लिम बहुल इलाकों में 12 से ज्यादा उम्मीदवार.

बीजेपी का शून्य होने से विपक्ष इसे ‘मुस्लिम विरोधी’ बता रहा है, लेकिन बीजेपी का तर्क है कि जिम्मेदारी टिकट से नहीं, काम से निभाई जाती है.

सवाल 4: इस फैसले से चुनावी समीकरण पर क्या असर पड़ सकता है?
जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि 2021 में 75% मुस्लिम वोट TMC को गया था. 2026 में भी ज्यादातर मुस्लिम वोट TMC या कांग्रेस की ओर जा सकता है. AIMIM जैसे छोटे दलों से वोट बंट सकता है. ये बीजेपी के लिए अप्रत्यक्ष फायदा हो सकता है. कुल मिलाकर बीजेपी का टारगेट हिंदू वोट को एकजुट करके 2021 का 38% वोट शेयर बढ़ाना है. बीजेपी मुस्लिम बहुल सीटों पर भी हिंदू वोट कंसोलिडेशन से लड़ाई लड़ना चाहती है. वहीं, TMC का मुस्लिम वोट को और मजबूत करने पर जोर है.’

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मुस्लिम वोट बंटा तो बीजेपी को फायदा हो सकता है, लेकिन अगर TMC ने इसे एकजुट रखा तो मुस्लिम वोट का ध्रुवीकरण उसे और मजबूत करेगा.

 

लोकल पार्टीज ने मुस्लिम वोट काटा, तो फायदा बीजेपी को हो सकता है
लोकल पार्टीज ने मुस्लिम वोट काटा, तो फायदा बीजेपी को हो सकता है

सवाल 5: तो आखिर ये फैसला कितना बड़ा है और आगे क्या?
जवाब: 2026 का ये फैसला बीजेपी की बंगाल रणनीति का सबसे साफ संकेत है कि ‘विनेबिलिटी पहले, समुदाय का प्रतिनिधित्व बाद में.’ 2021 में 8 मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर भी कोई फायदा नहीं हुआ, इसलिए पार्टी ने अब इस दरकिनार कर दिया. बीजेपी के लिए ये सिर्फ उम्मीदवार सूची नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति की नई दिशा है. बीजेपी का कहना है कि 2 लाख मुस्लिम सदस्यों की सेवा विकास से होगी, न कि टिकट से. लेकिन विपक्ष इसे ‘मुस्लिमों को नजरअंदाज’ बता रहा है. असली फैसला 4 मई 2026 को मतगणना के दिन होगा.

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