बरेली के सेंथल में आयोजित ताजियती जलसे में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने तीखा और भावनात्मक संबोधन देते हुए कहा कि दुनिया के कई ताकतवर देश एकजुट होकर ईरान को घुटनों पर लाने की कोशिश कर रहे थे. दावा किया गया था कि दो-तीन दिन में ईरान को खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन अत्याधुनिक हथियारों और लगातार भीषण हमलों के बावजूद ईरान को झुकाया नहीं जा सका. अगर खुदा की मर्जी न हो तो कोई भी ताकत कामयाब नहीं हो सकती.”
कार्यक्रम की शुरुआत जामा मेहंदीया में हुई, जहां मासूम बच्चियों ने गुलाब के फूल भेंट कर डॉ. इलाही का स्वागत किया. इसके बाद वह हजारों लोगों की मौजूदगी में इमामबाड़ा जुल्फिकार हसनैन पहुंचे, जहां ईरान के शहीदों की याद में आयोजित ताजियती जलसे को संबोधित किया.
ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले
डॉ. इलाही ने आरोप लगाया कि करीब 40 दिनों तक ईरान पर रोजाना बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए. उन्होंने कहा कि इन हमलों में आधुनिक और विनाशकारी हथियारों का इस्तेमाल हुआ तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों और इंसानियत की खुलेआम अनदेखी की गई. उनके मुताबिक, महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों तक को निशाना बनाया गया, जिससे हालात बेहद भयावह हो गए.
हौसले और यकीन की थी जंग
डॉ. इलाही ने कहा कि हमलावर देशों ने पूरी रणनीति और तैयारी के साथ युद्ध छेड़ा था, लेकिन वे ईरान की आस्था, सब्र और हौसले को नहीं समझ सके. उन्होंने कहा कि यह जंग सिर्फ हथियारों की नहीं थी, बल्कि हौसले और यकीन की भी थी. जलसे में मौलाना कमर हसनैन ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि लंबे संघर्ष के बाद सच्चाई की ही जीत होती है. ईरान ने अपने जज्बे से यह साबित किया कि मजबूत इरादों के सामने बड़ी से बड़ी ताकत भी टिक नहीं सकती. इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही. पूरा माहौल गमगीन रहा, लेकिन साथ ही एकजुटता, हौसले और यकीन का संदेश भी स्पष्ट रूप से नजर आया.
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