संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण साल 2029 से लागू करने के लिए लाए जाने वाले विधेयकों को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. कुल तीन विधेयक लाए जाएंगे. इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार (5 अप्रैल 2026) तो पीएम मोदी ने कहा था कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले 2023 में पारित कानून को 2029 से लागू करवाने के लिए संसद का बजट सत्र तीन दिन बढ़ा दिया गया है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बजट सत्र 16, 17 और 18 अप्रैल को फिर आयोजित होगा.
देश के दोनों सदनों में महिला अधिकारों पर होगी चर्चा
महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा दोनों देशों की सदनों में होगी. इसे बकायदा सरकार विशेष सत्र बुलाने जा रही है. 16, 17 और 18 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र में महिलाओं के अधिकारों और देश में आधी आबादी के योगदान को लेकर एक स्वस्थ्य बहस सदन में देखने को मिलेगी. इसका मकसद देश के निर्वाचन क्षेत्र और पार्लियामेंट में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है. इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा.इस बिल पर चर्चा का उद्देश्य इसे लागू करने में आ रही मुश्किलों को दूर करना है. साथ ही संशोधन बिल को पारित कराना है.
किरण रिजिजू ने राज्यसभा में क्या बताया था?
इसके अलावा राज्यासभा में संसदीय कार्यमंत्री रिजिजू ने बताया था कि संसद स्थगित हो जाएगी. महिलाओं के आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानून के लिए दो से तीन हफ्तों के बाद सदन फिर से बैठेगा. सदन की विधायी कामकाज पर जयराम रमेश के सवाल पर भी रिजिजू ने कहा था कि सरकार ने इस मामले में 80 प्रतिशत से ज्यादा पार्टियों से सलाह मशविरा किया है.
विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस ने सरकार को पत्र लिखा था
वहीं इस विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस ने सरकार को पत्र लिखकर विधानसभा चुनाव के बाद संसद बुलाने की मांग की थी. इस पर रिजिजू ने कहा था कि सरकार मनमाने ढंग से काम नहीं कर रही है. सभी पार्टी के सांसदों से सलाह ली जा रही है. रिजिजू ने कहा कि महिलाओं का आरक्षण का ऐसा मुद्दा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया जाना चाहिए. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी की थी.
यह भी पढ़ें:
शिक्षामित्रों से अखिलेश यादव की अपील से गरमाई सियासत, कहा- ‘हर विधानसभा में 22 हजार वोट…’



