Thursday, April 2, 2026
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टूरिज्म वीजा पर आए थे 6 यूक्रेनी और एक अमेरिकी, मिजोरम से गए थे म्यांमार, NIA को आतंकी लिंक का शक

पटियाला हाउस कोर्ट की एनआईए अदालत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने खुलासा किया है कि एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ बड़ी आतंकी साजिश की जांच चल रही है. एनआईए को शक है कि इन विदेशी नागरिकों के संबंध भारत और म्यांमार के कुछ जातीय विद्रोही संगठनों से हो सकते हैं और उन्हें ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग देने की भी आशंका है.

ड्रोन ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय साजिश की जांच

एनआईए ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान कई नए सबूत सामने आए है जिनसे संकेत मिलता है कि यह मामला केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इंटरनेशनल स्तर की साजिश हो सकती है. एनआईए के मुताबिक आरोपियों ने भारत के मिजोरम राज्य के रास्ते म्यांमार में प्रवेश किया था और यह पहलू जांच के दायरे में है. एनआईए का कहना है कि इन विदेशी नागरिकों पर UAPA की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है. इस धारा में आतंकी गतिविधियों की साजिश, तैयारी, उकसाने या मदद करने जैसे अपराध शामिल होते हैं.

मोबाइल डेटा और तकनीकी जांच

एनआईए ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं और उनमें मौजूद डेटा की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है. इसके लिए मोबाइल फोन को इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम और अन्य तकनीकी संस्थानों को भेजा गया है. एनआईए का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों से मोबाइल डेटा के आधार पर और गहराई से पूछताछ की जाएगी ताकि साजिश की पूरी सच्चाई सामने आ सके.

जांच का दायरा कई राज्यों तक फैला हुआ है 

एनआई ने कोर्ट में बताया कि इस मामले की जांच केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है. एनआईए की टीमें कई राज्यों में जाकर भी जांच कर चुकी हैं. एजेंसी के मुताबिक यह मामला काफी संवेदनशील है, इसलिए जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक दस्तावेजों में शामिल नहीं किया गया है.

बचाव पक्ष का दावा

आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में कहा कि अब तक आरोपियों के पास से कोई ड्रोन बरामद नहीं हुआ है. उनका कहना है कि यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है कि आरोपियों ने किसी को ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग दी है.

अदालत ने उठाए कई सवाल

एनआईए स्पेशल कोर्ट ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए कई सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी है कि विदेशी नागरिक भारत क्यों आए थे. वे म्यांमार क्यों गए. ड्रोन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और क्या उनका किसी भारतीय या किसी विद्रोही संगठन से संबंध है. एनआईए स्पेशल कोर्ट ने कहा कि केस डायरी में दर्ज तथ्यों के आधार पर यह मामला काफी संवेदनशील दिखाई देता है और इसकी गहन जांच जरूरी है.

पर्यटक वीजा पर भारत आए थे आरोपी

जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि कुछ यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों में पर्यटक वीजा पर भारत आए थे. वे पहले गुवाहाटी पहुंचे और वहां से मिजोरम चले गए, लेकिन उन्होंने वहां जाने के लिए जरूरी दस्तावेज जैसे Restricted Area Permit या Protected Area Permit नहीं लिए थे. इसके बाद वे कथित तौर पर अवैध तरीके से म्यांमार में घुस गए जहां उन्हें कुछ सशस्त्र जातीय संगठनों को पहले से तय कार्यक्रम के तहत ट्रेनिंग देने जाना था. अब इस पूरे मामले में एनआईए अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन, ड्रोन ट्रेनिंग और संभावित आतंकी साजिश के सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है.

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