ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद पश्चिम एशिया में तनाव 29वें दिन भी नहीं थमा है. अमेरिका ने सीजफायर का ऐलान कर दिया, लेकिन ईरान उस पर अमल करने को तैयार नहीं दिख रहा है.
दिल्ली के जंतर मंतर पर शनिवार (28 मार्च, 2026) को शिया और सुन्नी समुदाय के सैकड़ों लोग इजरायल, अमेरिका और सऊदी अरब के खिलाफ एकजुट होकर उतरे. प्रदर्शनकारियों ने खास तौर पर सऊदी अरब को निशाने पर लिया और जोरदार उसके खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
इजरायल ईरान पर दबाव बनाना चाह रहा है- जुल्फिकार
एबीपी न्यूज से बातचीत में ग्लोबल हुसैनी मिशन के चेयरमैन जुल्फिकार अहमद ने सऊदी अरब और बाकी की खड़ी देशों पर बेहद तीखे आरोप लगाते हुए कहा, ‘सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किए आज पाकिस्तान जा रहे हैं. ये सब इजरायल और अमेरिका से मिले हुए है, इजरायल ईरान पर दबाव बनाना चाह रहा है. इसलिए ये इनको पाकिस्तान भेजा जा रहे हैं ताकि ईरान को किसी भी तरीके से रोका जा सके, लेकिन ईरान रुकने वाला नहीं है.’
उन्होंने कहा, ‘एक वक्त ऐसा आएगा जब अमेरिका खुद बैठकर ईरान से प्यार से बात करने को मजबूर हो जाएगा, लेकिन ट्रंप पर कोई भरोसा नहीं है. वो सीजफायर सिर्फ समय खरीदने के लिए कर रहा है. वो अपनी फोर्स को मजबूत कर रहा है और फिर हमला करेगा, लेकिन ईरान इजरायल और अमेरिका की ये चाल अच्छी तरह समझ रहा है.’
पहले लोग लंदन में शराब पीते थे, अब सऊदी में- जुल्फीकार
जुल्फिकार अहमद ने सऊदी अरब को यहूदियों की औलाद जैसा बर्ताव करने वाला करार देते हुए कहा, ‘सऊदी अरब इजरायल और अमेरिका से साफ मिला हुआ है. अगर ये सच्चा मुस्लिम देश होता तो पैगंबर मुहम्मद साहब की बेटी की मजार तोड़ता? उनके नवासों के मजार तोड़ता? ये यहूदियों की औलाद जैसा बर्ताव कर रहा है. यहां अब सिर्फ नशा, जुआ और लड़कियां नचाई जाती हैं. पहले लोग शराब पीने, जुआ खेलने और लड़कियों का डांस देखने के लिए लंदन जाते थे, अब सऊदी अरब जा रहे हैं. फिर भी ये खुद को मुसलमानों का लीडर बताता है. शर्म आनी चाहिए इनको, ये कुछ भी नहीं है.’
उन्होंने कहा, ‘खामेनेई साहब हमारे रहबर थे. उन्हें निर्दोष मारा गया, वो भी रोजे के महीने में. इसलिए हम इजरायल, अमेरिका, सऊदी और कतर के खिलाफ सड़क पर उतरे हैं.’
एपस्टीन फाइल्स को लेकर बोले जुल्फीकार
एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘एपस्टीन फाइल में सऊदी के राजा का नाम भी है, दुबई वालों का भी. इसलिए ये डर रहे हैं कि ये सब सिर्फ नाम के मुसलमान हैं. इनमें इंसानियत नाम की चीज नहीं बची. मिडिल ईस्ट के मुसलमान सच्चे मुसलमान नहीं रहे हैं. ये शराब पीते हैं, जुआ खेलते हैं. ये यजीद की औलाद हैं.’
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या?
- पैगंबर मुहम्मद साहब की बेटी का मजार फिर से बनाया जाए, जिसे सऊदी सरकार ने करीब 100 साल पहले तोड़ दिया था.
- सऊदी अरब पाकिस्तान को जो टेररिस्ट फंडिंग दे रहा है, खासकर मुनीर जैसे लोगों को, उसे तुरंत बंद करें. क्योंकि ये फंडिंग भारत समेत दुनिया भर में आतंकवाद फैला रही है.
- सऊदी अरब और कतर, इजरायल-अमेरिका को जो समर्थन दे रहे हैं, उसे फौरन रोकें.
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