भारत में बढ़ते निवेश फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए अब गूगल बड़ा कदम उठाने जा रहा है. कंपनी ने ऐलान किया है कि वह अपने ऐप स्टोर पर मौजूद इन्वेस्टमेंट ऐप्स को वेरिफाइड लेबल देगा ताकि यूजर्स असली और फर्जी प्लेटफॉर्म के बीच आसानी से फर्क कर सकें.
सिर्फ SEBI-रजिस्टर्ड ऐप्स को मिलेगा वेरिफिकेशन
इस नए सिस्टम के तहत वही ब्रोकर्स और इंटरमीडियरी ऐप्स वेरिफाइड माने जाएंगे जो भारत के मार्केट रेगुलेटर SEBI में रजिस्टर्ड हैं. इसका सीधा मतलब है कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले या संदिग्ध ऐप्स को यह टैग नहीं मिलेगा, जिससे यूजर्स को सुरक्षित विकल्प पहचानने में मदद मिलेगी.
फ्रॉड पर बड़ा एक्शन- फिनफ्लुएंसर्स भी रडार पर
यह कदम ऐसे समय में आया है, जब रेगुलेटर फर्जी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, बिना लाइसेंस वाले प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर निवेश सलाह देने वाले फिनफ्लुएंसर्स पर सख्ती बढ़ा रहा है. सरकार और रेगुलेटर्स का फोकस है निवेश के नाम पर हो रहे स्कैम को रोका जाए.
600 से ज्यादा ऐप्स को मिला शुरुआती टैग
गूगल के मुताबिक भारत में करीब 600 फाइनेंशियल सर्विस ऐप्स को पहले ही वेरिफाइड लेबल इन्वेस्टमेंट ऐप्स पर सख्ती की जा चुकी है. SEBI का एक्शन अब गूगल पर वेरिफाइड टैग से बचे हुए फिनफ्लुएंसर्स भी रडार पर हैं. कंपनी का कहना है कि इसका मकसद एक ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम बनाना है जहां यूज़र्स भरोसे के साथ निवेश कर सकें.
फर्जी ऐप्स की नकल करना होगा मुश्किल
SEBI के मुताबिक वेरिफाइड बैज से असली फाइनेंशियल ऐप्स की नकल करना काफी मुश्किल हो जाएगा. इससे यूजर्स को भी यह समझने में आसानी होगी कि कौन सा ऐप भरोसेमंद है और कौन नहीं. SEBI ने यह भी संकेत दिया है कि Google और Meta जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर बिना रजिस्ट्रेशन वाले फाइनेंशियल विज्ञापनों को रोकने की दिशा में काम किया जाएगा. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के साथ भी तालमेल बढ़ाया जाएगा ताकि ऑनलाइन फ्रॉड पर कड़ी नजर रखी जा सके.
यह भी पढ़ें: सर्वदलीय बैठक के बाद संजय सिंह बोले, ‘पाकिस्तान कैसे चौधरी बन रहा है, सरकार ने…’



