सरकार ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को उसका ऐतिहासिक 24, अकबर रोड स्थित दफ्तर शनिवार तक खाली करने को कहा है. यह कदम आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है. कांग्रेस फिलहाल इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है.
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने कांग्रेस को 24, अकबर रोड स्थित अपने पुराने मुख्यालय को खाली करने का निर्देश दिया है. यह दफ्तर करीब 48 साल तक कांग्रेस का मुख्यालय रहा. हालांकि, पार्टी ने पिछले साल कोटला मार्ग पर बने अपने नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ का उद्घाटन कर दिया था, लेकिन अब तक अकबर रोड स्थित दफ्तर पूरी तरह खाली नहीं किया गया है और वहां गतिविधियां जारी हैं. साथ ही कांग्रेस को 5, रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस का दफ्तर भी खाली करने को कहा गया है.
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस मामले में राहत पाने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है. जब सोनिया गांधी ने नए मुख्यालय का उद्घाटन किया था, तब कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि 24, अकबर रोड से उनका भावनात्मक जुड़ाव हमेशा बना रहेगा.
कांग्रेस के लिए खास है यह दफ्तर
24, अकबर रोड का यह बंगला इतिहास से जुड़ा रहा है. ब्रिटिश शासन के दौरान यहां वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल रहते थे. 1960 के दशक की शुरुआत में यह बंगला म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) की भारत में राजदूत डॉ खिन क्यी का निवास भी रहा. उनकी बेटी आंग सान सू की, जो बाद में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता बनीं, ने भी यहां कई साल बिताए.
कांग्रेस के स्वर्णिम दौर का गवाह
इस बंगले का सबसे अहम दौर 1970 के दशक के अंत में शुरू हुआ. 1977 के चुनाव में हार के बाद कांग्रेस में विभाजन हुआ और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट को काम करने के लिए जगह की जरूरत पड़ी. राज्यसभा सांसद जी वेंकटस्वामी ने अपना अकबर रोड स्थित बंगला उन्हें दिया. यहीं से कांग्रेस की वापसी की कहानी शुरू हुई.
यह दफ्तर राजीव गांधी, पी.वी. नरसिंह राव और डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल तक कांग्रेस का मुख्यालय बना रहा. बाद में पार्टी ने अपनी जरूरतों के हिसाब से इसे विस्तारित किया, जब तक कि उसे नया मुख्यालय नहीं मिल गया.



