दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर फरवरी 2025 में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, के सी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव , डीएमके नेताओं कनिमोझी और ए राजा समेत अन्य नेताओं को फिलहाल बड़ी राहत दी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में रॉउज एवन्यू कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी है. यह मामला फरवरी 2025 में जंतर मंतर पर आयोजित उस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है. जिसमें कई विपक्षी सांसदों ने यूजीसी ड्राफ्ट के गाइड लाइन के खिलाफ प्रदर्शन किया था. दिल्ली पुलिस का आरोप है कि यह प्रदर्शन बिना अनुमति के आयोजित किया गया था.
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अनूप जयराम बमबानी ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने डीएमके नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. दिल्ली हाई कोर्ट से इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है. कोर्ट ने फिलहाल रॉउज एवन्यू कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी.
क्या है पूरा मामला
दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि 6 फरवरी 2025 को जंतर-मंतर पर यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था. इस प्रदर्शन में डीएमके सहित विभिन्न दलों के लगभग 15 सांसद शामिल हुए थे. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की थी. पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया गया. हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि प्रदर्शन के लिए कई बार अनुमति मांगी गई थी और मौखिक तौर पर अनुमति भी दी गई थी. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और इससे कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं हुई, इसलिए इस मामले में एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं था.
राउज एवेन्यू कोर्ट में लंबित है मामला
चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह मामला फिलहाल रॉउज एवन्यू कोर्ट में लंबित है. हालांकि अदालत ने अभी तक इस पर संज्ञान नहीं लिया है. इससे पहले 20 मार्च को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान नई दिल्ली के डीसीपी की ओर से एक रिपोर्ट दाखिल की गई थी. यह रिपोर्ट अदालत के निर्देश पर की गई जांच के आधार पर तैयार की गई थी. एडिशनल ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने इस दस्तावेज को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा था कि मामले में आगे की जांच के लिए दो सप्ताह का और समय चाहिए. अदालत ने इसके बाद सुनवाई को तीन हफ्ते के लिए टालते हुए अगली तारीख 14 अप्रैल तय की थी.
दिल्ली पुलिस जांच पर भी उठे सवाल
इस मामले में अदालत ने दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे. कोर्ट ने कहा था कि जिन 11 लोगों को चार्जशीट में आरोपी बनाया गया है, उनमें से 10 को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस तक नहीं दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार केवल सीवीएमपी ईझिलारासन को ही 7 अप्रैल 2025 को ई-मेल के जरिए जांच में शामिल होने का नोटिस भेजा गया था. अदालत ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले और दिल्ली पुलिस के 2020 के स्थायी आदेशों का पालन नहीं किया.
दिल्ली पुलिस अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण
कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित थाने के एसएचओ और एसीपी को निर्देश दिया कि वे यह स्पष्ट करें कि बिना आरोपियों को नोटिस दिए पुलिस रिपोर्ट कैसे दाखिल कर दी गई. साथ ही अदालत ने कहा कि यह आदेश दिल्ली पुलिस कमिश्नर के संज्ञान में भी लाया जाए ताकि जांच में हुई कथित लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई की जा सके. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी द्वारा निष्पक्ष और पूरी जांच न करना गंभीर मामला है और इस पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए. अब इस पूरे मामले पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट 12 अगस्त को आगे की सुनवाई करेगा.



