Thursday, March 19, 2026
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Mumbai CBI Court: | Mumbai CBI court sentenced 4 people in fraudulent letter of credit case loss of over 3 crore to Bank of India ann

मुंबई में Central Bureau of Investigation (CBI) की एक विशेष अदालत ने 2012 के बैंक धोखाधड़ी मामले में 4 लोगों को सजा सुनाई है. इस मामले में बैंक ऑफ इंडिया को 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ था. कोर्ट ने निजी कंपनी इन्फिनिटी ट्रांसमिशन के मालिक हरित मेहता को 5 साल की कैद और 3.50 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया. कंपनी के डायरेक्टर अभय मेहता को भी 5 साल की सजा और 1 करोड़ रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया गया.

इसके अलावा बैंक के पूर्व अधिकारी मनोजकुमार माथुर और एक अन्य आरोपी इलेश शाह को 3-3 साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया. यह फैसला विशेष जज अमित कुमार ने सुनाया. कोर्ट ने सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और 120-बी (साजिश) के तहत दोषी माना.

किस वजह से चर्चा में था केस?

Central Bureau of Investigation (CBI)  के अनुसार यह मामला फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) से जुड़ा था. 20 जुलाई 2009 को HDFC Bank की तरफ से जयंत एग्रो ऑर्गेनिक लिमिटेड के नाम पर एक LC जारी किया गया था, जिसे बैंक ऑफ इंडिया की नरीमन प्वाइंट शाखा में भेजा गया. इस LC का फायदा इन्फिनिटी ट्रांसमिशन को मिला. जांच में सामने आया कि यह LC फर्जी था और इसी के जरिए बैंक को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया.

CBI कैसे करती है काम?

CBI देश की एक बड़ी जांच एजेंसी है, जो गंभीर और बड़े मामलों की जांच करती है. CBI उन मामलों को देखती है, जिनका असर आम लोगों या पूरे देश पर पड़ता है. CBI मुख्य रूप से 3 तरह के मामलों की जांच करती है. सबसे पहले आते हैं भ्रष्टाचार के मामले. इसमें सरकारी अधिकारी, नेता या कर्मचारी अगर रिश्वत लेते हैं, अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हैं या सरकारी पैसे में गड़बड़ी करते हैं तो ऐसे मामलों की जांच CBI करती है. बड़े-बड़े घोटाले इसी में आते हैं.

दूसरे होते हैं आर्थिक अपराध. इसमें बैंक फ्रॉड, पैसों की धोखाधड़ी, फर्जी कंपनियां बनाकर पैसा घुमाना या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामले शामिल होते हैं. जब किसी बैंक या लोगों को करोड़ों रुपये का नुकसान होता है, तो ऐसे केस CBI तक पहुंचते हैं. तीसरे होते हैं विशेष अपराध. इसमें बड़े और संवेदनशील केस आते हैं, जैसे हाई-प्रोफाइल हत्या, अपहरण, आतंकवाद से जुड़े मामले या संगठित अपराध. ऐसे केस आमतौर पर पूरे देश में चर्चा में रहते हैं और इनकी जांच CBI को सौंपी जाती है.

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