Monday, March 16, 2026
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‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार तो ममता कालिया का आया रिएक्शन? जानें क्या कहा

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भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से सोमवार (16 मार्च, 2026) को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2026 की घोषणा की गई है. केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने प्रसिद्ध लेखिका ममता कालिया को उनकी लिखित संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है.

प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार जीतने के बाद लेखिका ममता कालिया ने खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि इस बात से मुझे बड़ी खुशी हुई है कि संस्मरण विधा को इस बार साहित्य अकादमी के पुरस्कार सूची में स्थान मिला है. उन्होंने कहा कि मैंने इस किताब को बड़ी ही शिद्दत के साथ लिखा था और जब मैंने इस लिखा था तब इसे लिखते हुए मैंने बहुत मजा किया था, क्योंकि मैं अपने प्रिय शहर की गलियों में घूम रही थी, सड़कों पर घूम रही थी और इलाहाबाद को मैंने अपने लिए जिंदा कर लिया था.

30 सालों तक शहर में रहने के बाद वो अपना बन जाता हैः ममता

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में लेखिका ममता कालिया ने कहा, ‘मुझे इस किताब को लिखते हुए वहां का जीवन, वहां के दोस्त, वहां की दोस्ती, शरारतें सभी याद आईं. यहां तक कि मुझे वहां की धूल भरी सड़कें भी अच्छी लगीं और मैंने इस किताब को उसी तरह से लिखा कि जब आप किसी शहर में 30 सालों तक रह लेतें हैं, तो वह शहर आपका अपना बन जाता है.’

उन्होंने कहा, ‘जीते जी इलाहाबाद किताब में इलाहाबाद की गलियां हैं, सड़कें हैं, जीवन है और वहां का खलबलाता हुआ सारा माहौल है, जिसमें लेखक रहते हैं, सांस लेते हैं, बनते हैं और कई बार वहां दम भी तोड़ देते हैं.’

इलाहाबाद का नाम बदलने पर क्या बोलीं ममता कालिया?

इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज होने पर लेखिका ममता कालिया ने कहा, ‘इलाहाबाद अपने आप में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शहर रहा है और इस शहर ने लोगों पर बहुत असर डाला है. आप वहां प्रकृति की मनोरम छटा, वहां के पुनप्पा रोड पर जिस तरह से पतझड़ आता है और जिस तरह सूखे पत्ते चरमराते हैं, वो आवाज आप कहीं और नहीं सुन सकते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘कंपनी बाग में जिस तरह वहां बच्चे पेड़ों से आम और अमरूद तोड़ते हैं, वो नजारा कहीं नहीं मिल सकता है. इलाहाबाद खुद में ही एक पूरा का पूरा माहौल है. वहां एक तरफ हाई कोर्ट है, जहां के बड़े से बड़े जज भी साहित्य में रूचि रखते हैं.’

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