मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर कांग्रेस मोदी सरकार को घेर रही है. कांग्रेस का कहना है कि ये बंदरगाह अब भारत की प्राथमिकताओं में दिखाई नहीं दे रहा है और ताजिकिस्तान के आयनी में वायुसेना अड्डा बंद होने के बाद देश की कूटनीति को लगा दूसरा रणनीतिक झटका है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पीएम मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि शासन में निरंतरता एक ऐसी जरूरी हकीकत है, जिसे आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री कभी स्वीकार नहीं करते. उन्होंने कहा कि 1990 के दशक के आखिर में भारत ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाएं तलाशना शुरू किया था. आखिरकार तेहरान में 16वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने इन योजनाओं को नया प्रोत्साहन दिया था.
Continuity in governance is an essential reality that is never acknowledged by the self-obsessed Prime Minister.
Beginning in the late 1990s, India began to explore possibilities of making investments in Iran’s Chabahar port as part of an India-Afghanistan-Iran cooperation…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) March 15, 2026
मनमोहन सिंह का जिक्र कर क्या बोले रमेश
कांग्रेस नेता ने बताया कि मई 2013 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुरुआत में चाबहार में 11 करोड़ 50 लाख अमेरिकी डॉलर के निवेश को मंजूरी दी थी. यह याद रखना चाहिए कि यह फैसला उस समय लिया गया था, जब भारत अक्टूबर 2008 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लागू करने के लिए बड़े कदम उठा रहा था. उन्होंने कहा कि इसके बाद अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार ने जैसा कि वह हमेशा करती रही है डॉ. मनमोहन सिंह की चाबहार पहल को नए तरीके से पेश कर उसे प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण का हिस्सा बताया.
‘चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं किया’
जयराम रमेश ने आगे कहा कि 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया. क्या इसका मतलब यह है कि भारत इससे बाहर हो गया है या फिर फिलहाल उसकी निवेश संबंधी प्रतिबद्धताएं पूरी हो चुकी हैं? उन्होंने आगे कहा कि इसका मतलब है कि चीन द्वारा निर्मित पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से करीब 170 किलोमीटर पश्चिम में स्थित चाबहार अब भारत की प्राथमिकताओं में नहीं दिख रहा.
उन्होंने आगे कहा कि ये ताजिकिस्तान में दुशांबे के पास आयनी में भारतीय वायुसेना अड्डे को बंद किए जाने के बाद भारत की मध्य एशियाई कूटनीति को लगा दूसरा रणनीतिक झटका है. भारत ने अतीत से अलग रुख अपनाते हुए अपने केंद्रीय बजट में चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया.
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