विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम सभी के लिए चिंता की बात है. जयशंकर ने बताया कि यह सब 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ, जब ईरान के नेतृत्व सहित कई बड़े हमले हुए और काफी जान-माल का नुकसान हुआ. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की.
CCS बैठक में ईरान जंग पर हुई चर्चा
जयशंकर ने कहा, ‘कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक 1 मार्च 2026 को हुई थी. इसमें ईरान पर हमलों और उसके बाद के हमलों पर चर्चा हुई. बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रभाव पर भी फोकस किया गया. सरकार ने सभी मंत्रालयों को उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.’
जयशंकर ने जोर देते हुए कहा है कि मिडिल ईस्ट संघर्ष भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है. खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं. ईरान में भी काफी भारतीय पढ़ाई और अन्य कामों के लिए हैं. उन्होंने बताया कि सप्लाई चेन में गंभीर व्यवधान आ रहा है. मर्चेंट नेवी के जहाज पर हमले हुए हैं, जिसमें 2 भारतीयों की मौत हो गई और 1 लापता है.
विदेश मंत्रालय ने ईरान में भारतीयों को दी एडवाइजरी
एस जयशंकर ने मोदी सरकार की कार्रवाई पर कहा कि सरकार लगातार स्थिति का आकलन कर रही है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान में गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है. भारतीय दूतावास वहां के भारतीयों से संपर्क में हैं और जरूरी सावधानियां बरतने को कह रहे हैं.
जयशंकर ने साफ कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. सरकार सभी संबंधित देशों से बात कर रही है ताकि भारतीय सुरक्षित रहें और स्थिति जल्द सामान्य हो.
यह बयान संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन आया, जब विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी. जयशंकर ने सभी पक्षों से डायलॉग और डिप्लोमेसी के रास्ते अपनाने की अपील दोहराई.



