Sunday, March 8, 2026
spot_img
HomeBusinessबांग्लादेश से भागकर 38 साल पहले असम में बसी थी महिला, अब...

बांग्लादेश से भागकर 38 साल पहले असम में बसी थी महिला, अब CAA के तहत मिली नागरिकता 

असम में सीएए (CAA) कानून के तहत एक विदेशी घोषित महिला को भारत की नागरिकता मिली है. मामला असम के कछार जिले का है. यहां विदेशी घोषित किए जाने के बाद दो साल हिरासत में बिताने वाली एक महिला को नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत नागरिकता प्रदान की गई है. यह जानकारी खुद महिला के वकील ने दी है.

मामला धोलाई विधानसभा के हवैथांग इलाके का है. यहां 59 साल की दीपाली दास नाम की महिला को फरवरी 2019 में अवैध प्रवासी घोषित किया था. वह असम की पहली विदेशी महिला थीं. इन्हें निरुद्ध केंद्र में रखा गया, हालांकि बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया, ताकि उसे सीएए के तहत भारत की नागरिकता मिल सके.

महिला के वकील ने क्या जानकारी दी?

महिला के वकील धर्मानंद देव का कहना है कि अधिकरण के आदेश के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया. उसी साल 10 मई को सिलचर के निरुद्ध केंद्र भेजा. यहां वो लगभग दो साल रहीं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 17 मई 2021 को जमानत पर रिहा किया गया.

उन्होंने बताया कि दीपाली मूल रूप से बांग्लादेश के सिलहट जिले के धीराई थानांतर्गत आने वाले दिपपुर गांव की रहने वाली हैं. उन्होंने 1987 में हबीगंज जिले के बनियाचोंग थाने के पराई गांव के अभिमन्यु दास से शादी की थी. इसके एक साल बाद 1988 में महिला अपने पति के साथ भारत आ गए. कछार जिले में बस गए. तब से वहां रह रहे हैं.  

साल 2013 में पुलिस ने शुरू की थी जांच 

देव ने बताया कि साल 2013 में पुलिस ने उनके खिलाफ जांच शुरू की. इसके बाद उनकी नागरिकता पर सवाल उठने लगे. दो जुलाई 2013 को पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया. इसमें बताया गया कि दीपाली बांग्लादेश के बानियाचोंग की रहने वाली है. वह 1971 के बाद अवैध रूप से भारत में घुस आईं थी.

बाद में सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन में आरोप पत्र महत्वपूर्ण साबित हुआ. आवेदक को बांग्लादेश, पाकिस्तान, या अफगानिस्तान से भारत आने संबंधी दस्तावेज सबूत पेश करने होते हैं. अधिकतर मामलों में आवेदक इस तरह के दस्तावेज पेश करने में विफल रहते हैं. अधिकारियों ने दीपाली के दस्तावेज को वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किया है.

2021 में रिहा होने के बाद दीपाली ने सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहती थीं. अधिनियम के नियमों को 2024 में अधिसूचित किए जाने के बाद उसने कानूनी सहायता के लिए देब से संपर्क किया था.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments