मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी जंग की कीमत भारत को भी चुकानी पड़ेगी. कांग्रेस नेता ने कहा कि इस जंग की वजह से भारत में ईंधन महंगा हो जाएगा और आर्थिक विकास धीमा हो जाएगा.
राहुल गांधी ने कहा, सीधे तौर पर यह युद्ध अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच नजर आ रहा है लेकिन हकीकत में यह अमेरिका, चीन और रूस के बीच में एक व्यापारिक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को दिखाता है. राहुल ने कहा, अमेरिका वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी प्रमुख स्थिति को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है, जबकि चीन लगातार आगे बढ़ रहा है और अंतर को कम कर रहा है.
On the surface, it appears to be a war involving the United States, Israel, and Iran. In reality, it reflects a larger strategic contest between the United States, China and Russia.
The United States is trying to preserve its position as the dominant global power, while China is… pic.twitter.com/Pepumecbxc
— Congress (@INCIndia) March 6, 2026
‘तनाव बढ़ने से बिगड़ेंगे हालात’
राहुल गांधी ने कहा, मिडिल ईस्ट एनर्जी प्रोडक्शन में दुनिया का बड़ा केंद्र है, अब इस आपूर्ति पर प्रेशर बढ़ाया जा रहा है. उन्होंने कहा, होर्मुज ऑफ स्ट्रेट दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण रूट है. तनाव बढ़ने की वजह से इसके परिणाम इस क्षेत्र से कहीं ज्यादा दूर तक महसूस किए जाएंगे.
‘भारत को चुकानी होगी कीमत’
राहुल गांधी ने कहा, ‘जब ये शक्तियां आपस में लड़ रही हैं तो अन्य देशों को भी इसकी कीमत चुकानी होगी. खास तौर से भारत पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा, जो मध्य पूर्व से ऊर्जा आयात पर अपनी भारी निर्भरता रखता है.’
‘भारत में महंगा होगा ईंधन’
उन्होंने कहा, भारत में आने वाले तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी इलाके से आता है. अगर तनाव जारी रहा तो ऊर्जा की आपूर्ति में कमी आएगी, जिससे कीमतें बढ़ेंगी. भारत में ईंधन महंगा होगा और आर्थिक विकास की रफ्तार कम होगी.
‘हमें अपना स्टैंड क्लियर करना चाहिए’
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, ‘ऐसे हालात में भारत को अपनी प्रतिक्रिया में खास सावधानी बरतनी चाहिए. यह सिर्फ ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच का संघर्ष नहीं है. यह एक बड़े वैश्विक बदलाव को दर्शाता है. हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां इस तरह के संघर्ष अधिक बार हो सकते हैं. भारत को यह समझना होगा कि दुनिया एक अधिक अस्थिर और खतरनाक दौर में प्रवेश कर रही है. हमारी नीतिगत स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए.’



