उपराष्ट्रपति पद छोड़ने को लेकर जगदीप धनखड़ ने बड़ा बयान दिया है. जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था. उनका कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने अचानक इस्तीफा दे दिया दिया. उनके इस्तीफे को लेकर विपक्ष ने कई तरह के सवाल भी खड़े किए थे.
क्या बोले जगदीप धनखड़?
जगदीप धनखड़ ने कहा, ‘मैंने स्वास्थ्य के प्रति कभी लापरवाही नहीं बरती. मैंने जब कहा कि मैं पद त्याग रहा हूं, तो मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं बीमार हूं. मैंने कहा कि मैं स्वास्थ्य को अहमियत दे रहा हूं, जो देनी चाहिए. अपने शास्त्रों में लिखा हुआ है.’
जुलाई 2025 में दिया था इस्तीफा
21 जुलाई 2025 को जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर चौंका दिया था. मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया था. धनखड़ के अचानक दिए इस्तीफे को लेकर सियासी गलियारों में खूब चर्चाएं हुई थीं. विपक्षी दलों ने भी इसको लेकर सवाल खड़े किए थे और मामला कुछ और होने का दावा किया था.
2022 में संभाला था पद
धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था. उनका कार्यकाल 2027 तक था लेकिन इससे पहले ही उन्होंने अचानक पद छोड़ दिया. उनके इस्तीफे को लेकर इस लिए भी सवाल खड़े किए गए क्योंकि 21 जुलाई 2025 को अपना पद छोड़ने से ठीक 12 दिन पहले ही उन्होंने दिल्ली में स्थित जेएनयू यूनिवर्सिटी में एक प्रोग्राम में कहा था, ‘मैं सही समय पर रिटायर होऊंगा, 2027 में, अगर भगवान ने चाहा तो!’
जगदीप धनखड़ का सियासी सफर
जगदीप धनखड़ राजस्थान के झुंझनू जिले के किठाना गांव के रहने वाले हैं. चित्तौड़गढ़ के आर्मी स्कूल से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की. इसके बाद राजस्थान यूनिवर्सिटी से उन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण की. वह राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकील रहे. उन्होंने कांग्रेस से राजनीतिक की शुरुआत की. पीवी नरसिम्हा राव सरकार में सांसद रहे. इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया. चंद्रशेखर सरकार में वह केंद्रीय मंत्री बने थे. साल 2029 में उनको पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. 2022 में वह उपराष्ट्रपति के पद पर निर्वाचित हुए.



