देश में हाल के दिनों में विमान से जुड़े हादसों और घटनाओं के बढ़ने के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) हरकत में आ गया है. मंगलवार (24 फरवरी 2026) को DGCA ने चार्टर फ्लाइट, प्राइवेट जेट और हेलीकॉप्टर सेवाएं देने वाले नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स के साथ हाई-लेवल मीटिंग की. बैठक के बाद DGCA ने सख्त नियम लागू करने का ऐलान किया है.
DGCA का कहना है कि बीते 10 सालों के हादसों के आंकड़ों की समीक्षा में यह सामने आया कि कई मामलों में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का ठीक से पालन नहीं हुआ और फ्लाइट प्लानिंग में लापरवाही बरती गई और पायलट ट्रेनिंग में भी कमियां रहीं. इन्हीं वजहों से चार्टर और प्राइवेट उड़ानों में जोखिम बढ़ा. अब नियामक ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं चलेगा.
DGCA ने किए ये बदलाव
DGCA ने दो टूक कहा है कि अब से सुरक्षा हर हाल में सबसे ऊपर रहेगी चाहे वह VIP मूवमेंट हो या कमर्शियल विमान. फ्लाइट के दौरान पायलट इन कमांड का फैसला अंतिम माना जाएगा. अगर पायलट खराब मौसम या तकनीकी कारणों से फ्लाइट को डायवर्ट या कैंसिल करता है तो उस पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जा सकेगा.
नए नियमों के तहत चार्टर और प्राइवेट फ्लाइट ऑपरेटर्स को अपनी वेबसाइट पर विमान की उम्र, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और पायलट का अनुभव सार्वजनिक करना होगा. DGCA सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स की सेफ्टी रैंकिंग भी जारी करेगा, जिससे यात्रियों को पता चल सके कि कौन सा ऑपरेटर सेफ्टी मानकों पर कितना खरा उतरता है.
‘पायलट का लाइसेंस हो सकता है सस्पेंड’
DGCA कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर , फ्लाइट डेटा और टेक्निकल लॉग की रैंडम जांच बढ़ाएगा. नियम तोड़ने पर सिर्फ पायलट ही नहीं बल्कि ऑपरेटर के मैनेजमेंट को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा. फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट तोड़ने या सुरक्षा मानकों से नीचे लैंडिंग की कोशिश करने पर पायलट का लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है. वहीं ऑपरेटर पर जुर्माना लगने के साथ लाइसेंस या परमिट रद्द होने का भी खतरा रहेगा.
पुराने विमानों और जिन विमानों का मालिकाना हक बदला गया है उनकी मेंटेनेंस पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. जिन ऑपरेटर्स के पास अपनी मेंटेनेंस सुविधा है उनकी भी जांच होगी. मानकों पर खरे न उतरने पर उन्हें मान्यता प्राप्त एजेंसी से मेंटेनेंस कराना होगा. DGCA के मुताबिक नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स का विशेष सेफ्टी ऑडिट दो चरणों में किया जाएगा. पहला चरण मार्च की शुरुआत में और दूसरा चरण उसके बाद पूरा होगा. इसके जरिए पूरे सेक्टर में सेफ्टी कल्चर मजबूत करने की कोशिश की जा रही है.
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