Saturday, February 21, 2026
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‘रिटायरमेंट के 20 साल बाद तक…’, जनरल नरवणे की पुस्तक के विवाद पर पहली बार बोले राजनाथ सिंह

पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की पुस्तक के विवाद के बाद पहली बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान सामने आया है. उन्होने कहा कि पूर्व सेना प्रमुखों के किताब लिखने पर रोक नहीं लगेगी. रक्षा मंत्री ने उन खबरों को भी सरासर गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि सेना से जुड़े अधिकारियों को रिटायरमेंट के 20 साल बाद तक कोई किताब लिखने की इजाजत नहीं होगी.

जनरल नरवणे की किताब पर संसद में हंगामा

हाल में संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्षी नेता राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की किताब को छपने की इजाजत को लेकर सरकार से सवाल किया था. इसके बाद संसद में जबरदस्त विवाद रहा और सत्र चलने में काफी मुश्किल सामने आई. साल 2020 में चीन के साथ गलवान घाटी की झड़प और सीमा विवाद पर तकरार के दौरान, जनरल एमएण नरवणे (अब रिटायर) देश के सेना प्रमुख थे ( मार्च 2020-अप्रैल 2022). अक्तूबर 2023 में जनरल नरवणे ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को एक इंटरव्यू के जरिए बताया कि उन्होंने अपनी आत्मकथा, फॉर स्टार्स ऑफ डेस्टेनी लिखी है. पीटीआई ने इस पुस्तक के कुछ अंश भी प्रकाशित किए.

जनरल नरवणे की किताब में क्या है?

जनरल नरवणे ने पुस्तक में गलवान घाटी की झड़प (15-16 मई 2020) से लेकर चीन से हुए डिसइंगेजमेंट यानी सीमा विवाद को निबटाने को लेकर हुए समझौते के बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक कर दी थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोवल के साथ फोन पर बातचीत और बैठकों का सिलसिलेवार तरीके से अपनी किताब में लिखा है. उस किताब में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और चाइना स्टडी ग्रुप (CSG) की मीटिंग का भी जिक्र है.

रक्षा मंत्रालय ने पब्लिशिंग हाउस को किया तलब

पूर्व थलसेनाध्यक्ष ने अपने मातहत कमांडरों के साथ हुई बातचीत और उन्हें दिए ऑर्डर (दिशा-निर्देश) भी पुस्तक में लिखे हैं. बस इन सब बातों के जरिए सरकार (रक्षा मंत्रालय) ने सीधे जनरल नरवणे के बजाए, पुस्तक को प्रकाशित करने वाले पब्लिशिंग हाउस से किताब का पूरा ड्राफ्ट तलब कर लिया. जो पुस्तक, अप्रैल 2024 में प्रकाशित की जानी थी, उसे आज तक हरी झंडी नहीं मिली है. सूत्रों के मुताबिक, जनरल नरवणे की पुस्तक को ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट (ओएसए) और आर्मी एक्ट के तहत रोका गया है, क्योंकि किताब से रिलीज करने से सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक हो सकती है. 

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