राजेश कुमार पांडे उत्तर रेलवे के नए महाप्रबंधन बने हैं. मंगलवार (18 फरवरी) को उन्होंने आधिकारिक तौर पर अपना पदभार संभाल लिया. पांडे
भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग सेवा (IRSSE) के 1989 बैच के अधिकारी हैं.
गोरखपुर के रहने वाले, IIT दिल्ली से किया M.Tech
राजेश कुमार पांडे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के रहने वाले हैं. उनके पास अपने पद से जुड़ा हुआ लंबा अनुभव है. पांडे ने मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज, गोरखपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स में बी.ई. (B.E.) की पढ़ाई की, जिसके बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली से M.Tech किया.
विभाग में संभाले कई अहम पद
भारतीय रेलवे में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बरौनी में असिस्टेंट सिग्नल और दूरसंचार इंजीनियर के रूप में की थी. तब से, उन्होंने रेलवे नेटवर्क में कई हाई लेवल भूमिकाओं में अपनी सेवाएं दी हैं. आरडीएसओ (RDSO) में निरीक्षण निदेशक के रूप में उन्होंने क्वालिटी एश्योरेंस प्रोटकॉल में सुधार किया. पूर्व-मध्य रेलवे में वह समस्तीपुर मंडल में अपर मंडल रेल प्रबंधक और पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल में मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के रूप में काम कर चुके हैं.
इसके बाद पश्चिम रेलवे में कई अलग अलग पदों पर काम किया, खास तौर से मुंबई सब अर्बन सेक्शन में ‘एक्सल काउंटर’ की स्थापना का नेतृत्व किया जिससे कि मानसून के दौरान सेवाएं प्रभावित न हों. उनको रेलवे के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा प्रोजेक्ट्स में अहम भूमिका निभाने के लिए पहचाना जाता है. डीआरएम रहते उन्होंने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
‘कवच’ (Kavach) के विकास में खास रोल
राजेश कुमार पांडे ने भारत की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली, ‘कवच’ (Kavach) के विकास और इसके कार्यान्वयन में भी खास रोल निभाया है. हाल ही में, रेलवे बोर्ड में अपर सदस्य (सिग्नल) के रूप में काम करते हुए, उन्होंने 400 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर ‘कवच’ की स्थापना की सफलतापूर्वक निगरानी की थी, जिससे रेल सुरक्षा में भी काफी मदद मिलेगी.
तैयार किया उत्तर रेलवे का विजन
राजेश कुमार पांडे ने कार्यभार संभालते ही उत्तर रेलवे के लिए विजन भी तैयार कर लिये हैं. उत्तर रेलवे की कमान संभालते ही पांडे ने उत्तर रेलवे जोन को हाईटेक बनाने और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने के मकसद से रणनीतिक प्राथमिकताओं का ड्रॉफ्ट तैयार किया है. विजन के तहत परिचालन में संरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए संरक्षा सर्वोपरि रखा गया है. इसके बाद (पंचुअलिटी) सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवा वितरण को अहम बताया है. साथ ही बुनियादी ढांचा को मजबूत करना और गुणवत्ता पर ध्यान देते हुए रेलवे बुनियादी ढांचे का तेज़ गति से विकास करना है.



