देश के कई हिस्सों में जहां आए दिन हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव और संघर्ष की घटनाएं देखने को मिलती हैं, वहीं केरल के कोट्टायम में एक ऐसी घटना सामने आई है, जो सांप्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल के तौर पर देखी जा रही है. दरअसल, केरल राज्य के कोट्टायम में एक 62 वर्षीय हिंदू महिला ओमना राजेंद्रन की मौत हो गई, जिनके अंतिम संस्कार से पहले सभी तैयारियों और उनके पार्थिव शरीर को रखने के लिए कुमरनल्लूर स्थित मक्का मस्जिद ने धार्मिक एकता का संदेश देते हुए मदरसा हॉल में जगह मुहैया कराई.
संकरी गलियों में किराये के घर में रहता था ओमना का परिवार
मस्जिद के अंदर जहां आमतौर पर कुरान की आयतों की आवाज गूंजती है, उसी मस्जिद के मदरसा हॉल में शुक्रवार (13 फरवरी, 2026) को हिंदू मंत्रों की गूंज सुनाई दी. दरअसल, ओमना की गुरुवार (12 फरवरी, 2026) को शाम करीब सात बजे मौत हो गई थी. वह पिछले दो हफ्ते से काफी बीमार थीं और अस्पताल में भर्ती थीं. उनका परिवार एक किराये के घर में रहता था, जहां तक पहुंचने के लिए सड़क भी पर्याप्त नहीं थी. पतली और संकरी गलियों के कारण वहां स्ट्रेचर या मोबाइल फ्रीजर भी ले जाना संभव नहीं था. ऐसे में उनके पति राजेंद्रन और बेटी ज्योतिका ओमना के अंतिम संस्कार की व्यवस्था को लेकर काफी परेशान थे.
मस्जिद कमेटी ने खुद की मदद की पेशकश
इसी दौरान मक्का मस्जिद के कमेटी के पदाधिकारियों ने खुद आगे आकर मदरसा हॉल उपलब्ध कराने की पेशकश की. जब राजेंद्रन ने मस्जिद कमेटी की ओर से दिए स्वीकार कर लिया तो कमेटी ने इस मामले को व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से अपने अन्य सदस्यों के बीच रखा, जिस पर सभी ने सहमति जताई. गुरुवार की रात करीब 10 बजे ओमना के पार्थिव शरीर को मदरसा हॉल में लाया गया, जहां शुक्रवार दोपहर तक लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए आते रहे. इसके बाद शव को कोट्टायम के मट्टंबलम स्थित सार्वजनिक श्मशान घाट ले जाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया.
अंतिम संस्कार से जुड़े सभी इंतजाम मस्जिद प्रशासन ने किए
मक्का मस्जिद के प्रशासन ने ओमना के अंतिम संस्कार से जुड़े सभी जरूरी इंतजाम किए. मदरसा हॉल में जगह बनाने के लिए कमेटी के सदस्यों और ओमना के परिजनों ने मिलकर कुर्सिया और टेबल हटाईं, ताकि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा और मंत्रोच्चार किया जा सके.



