Friday, February 13, 2026
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‘RTI आवेदनों को नकारे जाने की संख्या क्या है?’, खरगे ने सरकार से पूछा सवाल, जानें क्या मिला जवाब

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में आरटीआई आवेदनों की अस्वीकृति दर को लेकर सरकार से सवाल पूछे. कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा कि क्या पिछले 5 वर्षों के दौरान सरकार के प्रत्येक मंत्रालय/विभाग द्वारा प्राप्त आरटीआई आवेदनों की संख्या और इस अवधि के दौरान प्रत्येक मंत्रालय/विभाग द्वारा अस्वीकृत आरटीआई आवेदनों की संख्या और प्रतिशत क्या है.

इसके अलावा खरगे ने अस्वीकृति के लिए सबसे अधिक बताए जाने वाले कारण, मंत्रालय/विभाग-वार और आरटीआई आवेदनों की अस्वीकृति दर को कम करने और प्रशासन में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में भी जानकारी मांगी.

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने क्या बताया 
इन सवालों का जवाब देते हुए कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत सरकार के प्रत्येक मंत्रालय/विभाग द्वारा प्राप्त, अस्वीकृत (धारा-वार) आरटीआई आवेदनों और अस्वीकृति के प्रतिशत पर डेटा संबंधित वर्षों के लिए केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुलंब-1 में उपलब्ध है. 

उन्होंने बताया कि सूचना के लिए आवेदनों को आरटीआई अधिनियम 2005 की विभिन्न धाराओं में निर्धारित आधारों पर अस्वीकृत किया जा सकता है. आरटीआई आवेदनों की अस्वीकृति दर प्रतिशत में वर्ष 2013-14 में 7.21% से घटकर 2024-25 में 3.26% हो गई है. मंत्री ने बताया कि केंद्रीय सूचना आयोग आरटीआई अधिनियम, 2005 और इसके प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए वार्षिक सम्मेलन आयोजित करता है. 

सरकार ने खर्च किए करोड़ों रुपये
इसके अलावा, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT) “आरटीआई अधिनियम का प्रसार” नाम से वार्षिक कार्यक्रम चलाता है, जिसके तहत राज्य सूचना आयोगों (SICs) को आरटीआई सप्ताह मनाने और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों (ATIs) को आरटीआई अधिनियम पर कार्यशालाएं आयोजित करने, गाइडबुक और प्रशिक्षण सामग्री प्रकाशित करने, जागरूकता पैदा करने, सार्वजनिक सूचना अधिकारियों (PIOs) और अपीलीय अधिकारियों के प्रशिक्षण, आरटीआई हेल्पलाइन स्थापित करने, वैज्ञानिक रिकॉर्ड प्रबंधन और स्व-प्रेरणा प्रकटीकरण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इस उद्देश्य के लिए 2018-19 से 2024-25 तक के पिछले 7 वर्षों में SICs और राज्य ATIs को ₹20.23 करोड़ जारी किए गए हैं.

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