पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार (9 फरवरी 2026) को राज्यसभा में बताया कि भारत के पास इतना पेट्रोलियम भंडार है, जिससे देश 74 दिनों तक अपनी तेल की जरूरतें पूरी कर सकता है. उन्होंने यह जानकारी प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए दी.
पुरी ने कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा देश है और ऐसे देश के लिए सुरक्षित और मजबूत तेल भंडार होना बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि अगर दुनिया में किसी तरह की उथल-पुथल होती है, जैसे युद्ध, आपूर्ति में रुकावट या कीमतों में भारी बढ़ोतरी तो भारत कमजोर स्थिति में नहीं रहेगा.
तेल रिफाइनरी सिस्टम मौजूद
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के पश्चिमी और पूर्वी तट दोनों जगह तेल रिफाइनरी सिस्टम मौजूद हैं, जिससे देश की आपूर्ति व्यवस्था मजबूत बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए पुरी ने बताया कि आज भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. इसके साथ ही भारत के पास दुनिया की चौथी सबसे बड़ी तेल शोधन क्षमता भी है. अभी भारत करीब 26 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल का सालाना शोधन करता है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाकर 32 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष किया जाएगा. इसके अलावा भारत पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक भी है.
क्यों बनाया गया पेट्रोलियम भंडार?
पुरी ने बताया कि पेट्रोलियम भंडार इसलिए बनाया गया है ताकि किसी भी वैश्विक संकट की स्थिति में देश की तेल जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकें. IEA के अनुसार, किसी भी देश के पास कम से कम 90 दिनों का तेल भंडार होना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत अपने रणनीतिक भंडार के साथ-साथ रिफाइनरियों में मौजूद तेल को भी जोड़कर कुल भंडार का आकलन करता है. अभी कुल मिलाकर भारत के पास 74 दिनों का तेल भंडार मौजूद है. उन्होंने माना कि आदर्श स्थिति में यह 90 दिनों का होना चाहिए, लेकिन फिलहाल 74 दिनों के भंडार से वह खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं. भविष्य में इसे और बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है.
53.3 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल
इसके अलावा, मंत्री ने लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) के जरिए आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन जगहों पर तेल भंडार बनाए हैं. इनकी कुल क्षमता 53.3 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की है. इन भंडारों में तेल की मात्रा बाजार की स्थिति के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है.



