Wednesday, February 11, 2026
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‘अमेरिका से तेल खरीदना भारत के हित में’, ट्रंप की शर्त को लेकर सवाल पर पीयूष गोयल ने दिया जवाब

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भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार (8 फरवरी, 2026) को अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर बोलते हुए रूसी तेल खरीद को लेकर सीधे जवाब देने से परहेज किया. उनसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस शर्त को लेकर सवाल पूछा गया था कि भारत अगर रूस से तेल खरीदेगा तो उस पर 25 फीसदी टैरिफ का जुर्माना फिर से लगा दिया जाएगा. इस दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका से तेल खरीदना भारत के हित में है.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने कहा, ‘अमेरिका से कच्चे तेल या LNG, LPG की खरीद भारत के अपने रणनीतिक हितों में है क्योंकि हम अपने तेल स्रोतों में विविधता ला रहे हैं.’ अमेरिका की ओर से रूसी तेल को मुद्दा बनाए जाने पर गोयल अब तक यही कहते आ रहे हैं कि यह मामला विदेश मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है.

ट्रेड डील को लेकर क्या बोले केंद्रीय मंत्री?

न्यूज एजेंसी एएनआई को रविवार (8 फरवरी, 2026) को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से पूछा गया कि अगर रूसी तेल या डिफेंस के मामलों पर द्विपक्षीय सहमति नहीं बनती, तो क्या इसका असर ट्रेड डील पर पड़ेगा? इस पर गोयल ने जवाब दिया, ‘नहीं, बिल्कुल नहीं.

उन्होंने कहा, ‘ट्रेड डील में यह तय नहीं होता है कि कौन किससे और क्या खरीदेगा. ट्रेड डील व्यापार के रास्ते को आसान बनाता है और प्राथमिकता के आधार पर पहुंच को सुनिश्चित करता है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का उद्देश्य ही प्राथमिक पहुंच देना होता है. जब हमें 18 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ मिलता है, तो हमें अन्य विकासशील देशों पर बढ़त मिलती है. यह देश आमतौर पर हमारे प्रतिस्पर्धी होते हैं.’

ट्रंप ने भारत के रूसी तेल के खरीद पर क्या दिया आदेश?

हालांकि, रूसी तेल को लेकर सवाल अभी भी बना हुआ है. ट्रंप ने अपने कार्यकारी आदेश में अमेरिकी वाणिज्य सचिव को यह भारत पर निगरानी करने का निर्देश दिया है, ताकि भारत कहीं रूसी तेल का आयात फिर से शुरू न कर दे. अगर ऐसा होता है तो अमेरिका, भारत पर फिर से जुर्माने के रूप में टैरिफ लगाएगा, जिसे हाल ही में हटाया गया है.

रूसी तेल खरीद पर MEA ने क्या कहा?

हालांकि रूस से तेल खरीद को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने क्लीयर कर दिया है कि भारत अपने 140 करोड़ लोगों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेगा. भारतीय कंपनियों को कहां से तेल और एनर्जी से जुड़े उत्पाद खरीदने हैं, ये उन्हें तय करना है. इससे एक बात तो क्लीयर होती है कि अमेरिका से हुई ट्रेड डील में रूसी तेल का जिक्र नहीं है.

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