Wednesday, February 11, 2026
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फ्रॉड कॉल-SMS की अब खैर नहीं! सरकार ले आई नया फीचर, एक क्लिक में करें शिकायत

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Chakshu: टेलीकॉम फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने संचार साथी पहल के तहत चक्षु नाम की एक खास सुविधा शुरू की है. दूरसंचार विभाग (DoT) के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म के जरिए अब नागरिक संदिग्ध कॉल, मैसेज और अन्य धोखाधड़ी वाले कम्युनिकेशन की सीधी शिकायत कर सकते हैं. सरकार ने संसद को बताया कि लोगों से मिली जानकारियों के आधार पर अब तक लाखों कनेक्शनों और संसाधनों पर कार्रवाई की जा चुकी है.

लाखों कनेक्शन बंद, हजारों फोन ब्लैकलिस्ट

नागरिकों की शिकायतों के बाद अब तक करीब 39.43 लाख मोबाइल कनेक्शन काटे जा चुके हैं. इसके साथ ही 2.27 लाख मोबाइल हैंडसेट ब्लैकलिस्ट किए गए हैं और 1.31 लाख ऐसे SMS टेम्पलेट्स को ब्लॉक किया गया है जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए हो रहा था. सरकार का कहना है कि इन कदमों से टेलीकॉम संसाधनों के गलत इस्तेमाल पर काफी हद तक रोक लगी है.

वेब पोर्टल और ऐप से आसान पहुंच

राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब में संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्र शेखर ने बताया कि संचार साथी पहल के तहत यह सुविधा एक खास वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए उपलब्ध है. इससे आम लोग बिना किसी झंझट के सीधे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं.

किन फ्रॉड मामलों की कर सकते हैं शिकायत

चक्षु सुविधा के तहत यूजर्स कई तरह की संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट कर सकते हैं. इसमें फर्जी कस्टमर केयर कॉल, किसी और बनकर बात करना, फिशिंग लिंक, निवेश से जुड़ी ठगी, ऑनलाइन नौकरी या लॉटरी के नाम पर किए जाने वाले फ्रॉड शामिल हैं.

अब तक कितनी शिकायतें आईं?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस सुविधा के शुरू होने के बाद से अब तक करीब 7.7 लाख संदिग्ध फ्रॉड कम्युनिकेशन की शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं. सिर्फ 2025 में ही 5.19 लाख से ज्यादा रिपोर्ट्स सामने आईं जिनमें KYC और पेमेंट से जुड़े फ्रॉड, सरकारी एजेंसियों का रूप धरकर ठगी और निवेश व ट्रेडिंग स्कैम सबसे ज्यादा रहे.

चक्षु का दायरा क्या है?

मंत्री ने स्पष्ट किया कि चक्षु सुविधा उन मामलों के लिए है, जहां धोखाधड़ी की कोशिश तो हुई हो लेकिन अभी तक किसी तरह का आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है. जिन मामलों में पैसे का नुकसान हो चुका है, उन्हें गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) संभालता है.

डेटा एनालिसिस से होती है कार्रवाई

DoT चक्षु के जरिए मिलने वाली सूचनाओं का विश्लेषण करता है और दोबारा सत्यापन के बाद मोबाइल यूजर्स पर कार्रवाई करता है. इन सभी कार्रवाइयों की जानकारी संचार साथी डैशबोर्ड पर भी उपलब्ध कराई जाती है.

डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से बड़ा फायदा

साइबर क्राइम और वित्तीय धोखाधड़ी को और प्रभावी तरीके से रोकने के लिए DoT ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) भी तैयार किया है. यह एक सुरक्षित ऑनलाइन सिस्टम है जहां अलग-अलग संस्थाएं आपस में जानकारी साझा करती हैं. अब तक इस प्लेटफॉर्म से 1,200 से ज्यादा संगठन जुड़ चुके हैं जिनमें सुरक्षा एजेंसियां, राज्य पुलिस, बैंक, टेलीकॉम कंपनियां, UPI और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं.

हजार करोड़ से ज्यादा की ठगी रोकी गई

DIP के जरिए साझा की गई जानकारियों के आधार पर कई लेनदेन समय रहते रोके गए और लोगों को अलर्ट भेजे गए. सरकार के मुताबिक, इससे अब तक 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय धोखाधड़ी को रोका जा चुका है. साथ ही WhatsApp ने साझा किए गए मोबाइल नंबरों से जुड़े करीब 28 लाख अकाउंट्स को बंद भी किया है.

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