Friday, February 13, 2026
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‘ऊंची जातियों का रिएक्शन है छात्रों का विरोध’, UGC के नए नियमों के समर्थन में दलील देने वालीं इंदिरा जयसिंह कौन?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने दखल देते हुए उन याचिकाओं का विरोध किया, जो नए नियमों को चुनौती दे रही थीं.

इंदिरा जयसिंह ने UGC के समर्थन में 5 दलीलें दीं

यह रेगुलेशंस विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए हैं. लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह नियम डिक्रिमिनेट्री (भेदभाव) हैं क्योंकि यह सिर्फ SC, ST और OBC के सदस्यों को ही सुरक्षा देते हैं. जबकि जनरल कैटेगरी और ऊपरी जातियों के लोगों को इससे बाहर रखा गया है. लेकिन यह गलत है. इंदिरा जयसिंह ने UGC की तरफ से 5 बड़ी दलीलें दीं हैं…

  • इन रेगुलेशंस को स्थगित करना गलत होगा क्योंकि यह दलित और ऐतिहासिक रूप से दबे-कुचले समुदायों के छात्रों के खिलाफ होने वाले वास्तविक भेदभाव की समस्या को उजागर करते हैं.
  • यह नियम 2012 के पुराने रेगुलेशंस का सुधार हैं, जो नाकाफी थे और जिनमें उल्लंघन पर सजा का प्रावधान नहीं था.
  • नए नियम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बने हैं और यह संरचनात्मक असमानता को दूर करने के लिए जरूरी हैं.
  • छात्र संगठनों का विरोध ‘ऊपरी जाति की प्रतिक्रिया’ है. यह नियम अभी भी पूरी तरह से समस्या का समाधान नहीं करते, लेकिन इन्हें लागू रखना चाहिए ताकि विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव पर कड़ी कार्रवाई हो सके.
  • 2019 में दाखिल एक याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि दो माताओं ने SC/ST छात्रों के खिलाफ भेदभाव और आत्महत्या के मामलों पर ध्यान दिलाया था.

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन रेगुलेशंस पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC से जवाब मांगा है, लेकिन इंदिरा जयसिंह की दलीलों ने मामले में सामाजिक न्याय के पहलू को मजबूती से सामने रखा है.

इंदिरा जयसिंह कौन हैं?

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह भारत की एक प्रमुख मानवाधिकार वकील और कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के क्षेत्र में बड़े योगदान दिए हैं. उनका जन्म 3 जून 1940 को मुंबई में एक मिडिल क्लास सिंधी परिवार में हुआ था और उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई और बेंगलुरु से पूरी की. उसके बाद उन्होंने लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड लीगल स्टडीज से फेलोशिप भी हासिल की. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मुंबई में एक कानूनी फर्म से की और 1986 में बॉम्बे हाई कोर्ट की पहली महिला सीनियर एडवोकेट बनीं. 1981 में उन्होंने अपने पति आनंद ग्रोवर के साथ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ नाम की एक मानवाधिकार संगठन की स्थापना की, जो गरीबों, महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ता है.

इंदिरा जयसिंह 2009 में भारत की पहली महिला एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बनी गईं थीं. उन्होंने कई ऐतिहासिक मामलों में हिस्सा लिया, जैसे घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा का कानून बनाने में योगदान, HIV एड्स से जुड़े अधिकार और जेंडर इक्वालिटी से संबंधित केस. 2005 में उन्हें उनके सार्वजनिक योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया और 2018 में फॉर्च्यून मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 50 सबसे प्रभावशाली नेताओं की सूची में 20वें स्थान पर रखा. वह यूनाइटेड नेशंस की महिला भेदभाव उन्मूलन समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं.

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