Friday, February 13, 2026
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‘देश के कानून का उल्लंघन…’, किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज ने परिसर में बने दरगाह को भेजा नोटिस तो बोले मौलाना महमूद मदनी

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बुधवार (28 जनवरी, 2026) को लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज परिसर में हजरत हाजी हरमैन शाह दरगाह से सटी जगह में की गई अतिक्रमण रोधी कार्रवाई और हजरत मखदूम शाह मीना के परिसर में मौजूद मजारों के खिलाफ जारी किए गए ध्वस्तीकरण नोटिसों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कॉलेज प्रशासन को चेतावनी दी कि वह भ्रामक प्रचार के जरिए से वक्फ संपत्तियों से संबंधित देश के कानूनों का उल्लंघन करने से बाज आए और तत्काल इन नोटिसों को वापस ले.

मौलाना मदनी ने कहा कि किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से सटी यह मजार 700 साल से भी ज्यादा पुराने हैं, जबकि कॉलेज की स्थापना साल 1,912 में हुई थी. ऐसी स्थिति में यह कहना कि कॉलेज परिसर में दरगाहों का क्या काम है, सरासर झूठ और भ्रम फैलाने वाला है. उन्होंने कहा कि कॉलेज की स्थापना के वक्त, साल 1912 में ही, राजस्व विभाग ने दरगाह की भूमि को कॉलेज परिसर से अलग सीमांकन के माध्यम से स्पष्ट कर दिया था, जो उसकी स्थायी और स्वतंत्र कानूनी स्थिति का सबूत है.

वक्फ संपत्ति विवाद पर कार्रवाई का अधिकार सक्षम कोर्ट को हैः मदनी

मौलाना मदनी ने आगे कहा कि 26 अप्रैल, 2025 को लगभग 700 साल पुराने आस्ताना-ए-हजरत हाजी हरमैन शाह की सीमा में मौजूद वुजूखाना, इबादतगाह और जायरीनों की आवाजाही से संबंधित सुविधाओं को प्रोफेसर डॉ. केके सिंह की निगरानी में ध्वस्त किया जाना एकतरफा और पूरी तरह गैर-कानूनी कार्रवाई थी. इस संबंध में न तो कोई न्यायालयी आदेश मौजूद था और न ही किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली गई थी, बल्कि यह कार्रवाई एक गलत नैरेटिव की आड़ में की गई है.

उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि संबंधित भूमि वक्फ अधिनियम, 1995 के अंतर्गत विधिवत वक्फ संपत्ति है और सुन्नी वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड है. वक्फ कानून के अनुसार, वक्फ संपत्तियों से संबंधित किसी भी विवाद या कार्रवाई का अधिकार केवल सक्षम न्यायालय को है, न कि किसी शैक्षणिक संस्था या उसके किसी अधिकारी को. इसलिए इस प्रकार के नोटिस जारी करना और धमकीपूर्ण रवैया अपनाना पूरी तरह गैर-कानूनी है.

वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी पर क्या बोले मौलाना मदनी?

मौलाना मदनी ने कहा कि ऐसे मामलों में वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाए. प्राचीन धरोहरों, मजारों और धार्मिक स्थलों की संगठित पहचान के लिए एक विशेष अभियान चलाए, जिन हिस्सों को ध्वस्त किया गया है, उनकी पुनर्बहाली सुनिश्चित करे और मुतवल्लियों को संबंधित कानूनी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराए, ताकि आने वाले वक्त में इस तरह की घटनाओं और विवादों को प्रभावी रूप से रोका जा सके.

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