West Bengal News: पश्चिम बंगाल में कोलकाता के आनंदपुर इलाके से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. यहां नाजीराबाद इलाके में स्थित दो गोदामों में लगी भीषण आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है. इस हादसे के बाद पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ है. चारों तरफ मातम पसरा है और अपनों को खोने वालों का रो-रोकर बुरा हाल है.
आग इतनी भीषण थी कि कई शव बुरी तरह जल गए हैं. चेहरों की पहचान तक संभव नहीं हो पा रही है. इसी कारण शवों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लिया जा रहा है. आनंदपुर और आसपास के इलाकों के कई लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पताल, थाने और घटनास्थल के चक्कर काट रहे हैं.
दो गोदामों को निगल गई आग
जानकारी के मुताबिक, रविवार रात ईएम बाईपास के पास आनंदपुर के नाजीराबाद इलाके में पहले एक डेकोरेटर्स के गोदाम में आग लगी. देखते ही देखते आग पास के खाने-पीने के सामान वाले गोदाम तक फैल गई. कुछ ही मिनटों में आग की लपटों ने दोनों गोदामों को अपनी चपेट में ले लिया.
गोदाम के अंदर काम कर रहे कई कर्मचारी आग की चपेट में आ गए. प्रत्यक्षदर्शियों और लापता कर्मचारियों के परिजनों का आरोप है कि गोदाम का दरवाजा बंद था, जिससे अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल सके. कई कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुछ अब भी लापता बताए जा रहे हैं.
जेसीबी से मलबा हटाकर तलाश जारी
आग बुझने के बाद दमकल विभाग ने जेसीबी मशीन की मदद से जले हुए लोहे के ढांचे और मलबे को हटाना शुरू किया. इसके बाद अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि अभी भी कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है.
इस हादसे ने गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बताया गया है कि इतनी बड़ी फैक्ट्री में केवल 5 किलो के दो अग्निशमन यंत्र लगे हुए थे. न तो स्प्रिंकलर सिस्टम था और न ही कोई आधुनिक फायर डिटेक्शन सिस्टम. पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि आग लगने की स्थिति में कोई प्रभावी व्यवस्था मौजूद नहीं थी.
पूर्व कर्मचारी का बड़ा खुलासा
गोदाम के एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि वेयरहाउस बनाते समय स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने की बात हुई थी, लेकिन उसे कभी लागू नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि अंदर ज्वलनशील पदार्थ ज्यादा थे और आग बुझाने के लिए पर्याप्त साधन मौजूद नहीं थे.
दमकल अधिकारियों ने भी माना है कि आग बुझाने की व्यवस्था पूरी तरह से नाकाम साबित हुई. उनका कहना है कि सुरक्षा इंतजाम अगर सही होते तो जानमाल का नुकसान इतना बड़ा नहीं होता. इस हादसे के बाद कई गरीब परिवार उजड़ गए हैं. जिन घरों में खुशी थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है. आनंदपुर इस समय एक मृत्यु के शहर में बदल चुका है.



