अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक के दौरान अपने नए निकाय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का औपचारिक शुभारंभ किया. यह बोर्ड शुरुआत में गाजा में युद्धविराम की निगरानी और युद्ध से प्रभावित क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया था. हालांकि इस उद्घाटन समारोह में भारत शामिल नहीं हुआ. अमेरिका को छोड़कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का कोई भी स्थायी सदस्य और G7 देशों का कोई भी प्रतिनिधि इस पहल का हिस्सा नहीं बना.
अब तक कितने देश जुड़े
डोनाल्ड ट्रंप अब तक 11 देशों को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल करने में सफल रहे हैं. हालांकि अमेरिका के अलावा G7 समूह का कोई भी देश इसमें शामिल नहीं हुआ है. भारत उन लगभग 60 देशों में शामिल है जिन्हें इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन स्विस पर्वतीय रिसॉर्ट में हुए समारोह में भारत की ओर से कोई अधिकारी मौजूद नहीं था. भारतीय पक्ष ने कहा है कि बोर्ड में शामिल होने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.
भारत की चिंता क्या है
सूत्रों के अनुसार भारत इस मुद्दे पर अपने प्रमुख साझेदार देशों, जैसे फ्रांस और रूस, के रुख पर नजर बनाए हुए है. भारत को आशंका है कि यह नया बोर्ड आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका को कमजोर कर सकता है. इसके अलावा यह भी चिंता जताई जा रही है कि ट्रंप इस बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष बने रहेंगे, जिससे इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं.
क्या UN को चुनौती दे रहा है नया बोर्ड?
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के आधिकारिक चार्टर में गाजा का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जबकि इसे मूल रूप से गाजा संकट के समाधान के लिए बनाया गया बताया गया था. इसके बजाय बोर्ड को एक व्यापक अधिकार क्षेत्र दिया गया है, जिसके तहत वह दुनिया भर के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में दखल दे सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और ढांचों को चुनौती मिल सकती है.
ट्रंप का बड़ा दावा
समारोह के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पिछले नौ महीनों में आठ युद्ध खत्म कराए हैं. इसमें उन्होंने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव का भी जिक्र किया. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दोनों परमाणु देशों के बीच युद्ध रुकवाकर लाखों लोगों की जान बचाई.
भारत का रुख
भारत ने ट्रंप के इस दावे को पहले ही खारिज कर दिया है. भारत का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बनी आपसी समझ से कम हुआ था, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से.
पाकिस्तान की मौजूदगी चर्चा में
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के समारोह में पाकिस्तान सहित 19 देशों ने हिस्सा लिया. 11 देशों- जैसे इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, हंगरी और कजाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्षों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए. वहीं सऊदी अरब, तुर्की, यूएई और कतर जैसे देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी.
बोर्ड का नेतृत्व कौन करेगा
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के आजीवन अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप होंगे. उन्होंने सात सदस्यों को बोर्ड में शामिल किया है, जिनमें मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, टोनी ब्लेयर, अजय बंगा, मार्क रोवन और रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं. ट्रंप के दामाद और बोर्ड के कार्यकारी सदस्य जेरेड कुशनर ने गाजा के विकास के लिए एक योजना पेश की है. हालांकि इसमें फिलिस्तीनी राज्य के निर्माण का कोई उल्लेख नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि हमास के निशस्त्रीकरण और इजरायली सेना की वापसी जैसे जटिल मुद्दों के चलते इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा.
अब आगे क्या करेगा भारत?
भारत फिलहाल इस पूरे मामले पर ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना रहा है. इस विषय पर 30–31 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाली अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक में चर्चा हो सकती है. इसके अलावा फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित इजरायल यात्रा को भी क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.



