Wednesday, February 11, 2026
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VoIP एक्सचेंज क्या है? साइबर अपराधियों का ये काला जाल अब CBI की रडार पर, जानिए कैसे होता है डिजिटल फ्रॉड

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VoIP Exchange: देश में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच एक बार फिर VoIP एक्सचेंज चर्चा में आ गया है. बिहार के भोजपुर जिले के नारायणपुर गांव से चल रहे एक कथित अवैध फोन एक्सचेंज की जांच अब सीधे CBI के हाथ में है. मीडिया रिपोर्ट की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस सिस्टम का इस्तेमाल इंटरनेट कॉल्स को लोकल मोबाइल कॉल में बदलने के लिए किया जा रहा था ताकि बड़े पैमाने पर साइबर ठगी और संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके.

नारायणपुर से चल रहा था पूरा खेल

इस मामले की शुरुआत बिहार पुलिस की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट ने की थी. जांच के दौरान एक हाई-टेक SIM बॉक्स सेटअप सामने आया जो नारायणपुर गांव में सक्रिय था. SIM बॉक्स में कई सिम कार्ड लगाए जाते हैं जिनकी मदद से विदेश से आने वाली कॉल्स और मैसेज को लोकल नंबर के जरिए आगे भेज दिया जाता है.

इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल अक्सर अंतरराष्ट्रीय कॉल चार्ज से बचने या फिर ठगी के कॉल्स को लोकल दिखाने के लिए किया जाता है. जांच में सामने आया कि इस एक सेटअप से देशभर में 20 हजार से ज्यादा कॉल्स रूट की गई थीं. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इसी तरह के सिस्टम का इस्तेमाल विदेशी आतंकी नेटवर्क भी अपने स्लीपर सेल्स से संपर्क के लिए करते हैं.

आखिर VoIP एक्सचेंज होता क्या है?

VoIP एक्सचेंज असल में एक डिजिटल टेलीफोन एक्सचेंज की तरह काम करता है, फर्क सिर्फ इतना है कि यह इंटरनेट के जरिए कॉल्स को मैनेज करता है. यह सिस्टम अलग-अलग नेटवर्क और यूजर्स के बीच कॉल्स को सही जगह तक पहुंचाने का काम करता है.

जब इसे अवैध तरीके से इस्तेमाल किया जाता है तो इंटरनेट से आने वाली VoIP कॉल्स को मोबाइल नेटवर्क के अनुकूल फॉर्मेट में बदला जाता है. इसके लिए एक्टिव सिम कार्ड की जरूरत होती है जिससे कॉल लोकल मोबाइल नेटवर्क पर डाल दी जाती है. नतीजा यह होता है कि टेलीकॉम कंपनी और कॉल रिसीव करने वाले दोनों को यही लगता है कि यह एक सामान्य लोकल कॉल है जबकि असल में उसका सोर्स विदेश में होता है.

खुले सिस्टम का गलत फायदा

दुनिया भर की टेलीकॉम तकनीक इंटरऑपरेबिलिटी और स्टैंडर्ड्स पर आधारित होती है, ताकि अलग-अलग नेटवर्क आपस में जुड़ सकें. यही खुलापन कुछ शातिर लोगों को ऐसे गैरकानूनी हार्डवेयर बनाने का मौका देता है जो तकनीकी रूप से सही लेकिन कानूनन गलत होते हैं.

मालदा कनेक्शन और मास्टरमाइंड

जांच में यह भी सामने आया कि नारायणपुर के इस SIM बॉक्स में इस्तेमाल हो रहे सिम कार्ड पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से एक्टिवेट किए गए थे. ये सिम दो PoS ऑपरेटर्स रेजाउल हक और मुक्तादिर हुसैन के जरिए जारी किए गए थे.

CBI ने इस पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड मुकेश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज की है जो भोजपुर में अपने घर के अटारी से यह अवैध एक्सचेंज चला रहा था. इसके अलावा संदिग्ध 67 सिम कार्ड उपलब्ध कराने के आरोप में दोनों PoS ऑपरेटर्स के नाम भी केस में शामिल किए गए हैं.

CBI ने क्यों संभाली जांच?

इस अवैध ऑपरेशन का खुलासा जुलाई 2023 में बिहार पुलिस ने किया था. मामले की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से जांच कराने की मांग की. इसके बाद केंद्र सरकार की अधिसूचना पर CBI ने बिहार पुलिस की FIR को दोबारा दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली.

दिलचस्प बात यह है कि FIR में यह भी दर्ज है कि तेलंगाना पुलिस पहले ही नारायणपुर को संदिग्ध गतिविधियों का केंद्र मान चुकी थी जिससे साफ होता है कि एक छोटे से गांव में चल रहा यह सेटअप पूरे देश में फैले साइबर अपराध से जुड़ा था.

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