मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने न्यायिक सुधारों को लेकर दाखिल एक याचिका सोमवार (19 जनवरी, 2026) को खारिज कर दी. याचिका में मांग की गई थी कि सभी अदालतें हर मुकदमे में एक साल में फैसला दें. सीजेआई ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया. उन्होंने न्यायिक सुधारों के नाम पर दाखिल इस तरह की याचिका पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटीगेशन बताया.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि कोर्ट के बाहर खड़े कैमरामैन के सामने बोलने के लिए याचिका मत दाखिल कीजिए. याचिकाकर्ता ने पीआईएल दायर करके ऐसे आदेश की मांग की है कि सभी कोर्ट एक साल के अंदर सभी मुकदमों पर फैसला लें. सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने याचिकाकर्ता के इरादे पर सवाल उठाए.
चीफ जस्टिस सू्र्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप कह रहे हैं कि एक साल में हर अदालत हर मामले पर फैसला करे, ऐसा कितनी अदालतें चाहिए आपको. ऐसा निर्देश कैसे दिया जा सकता है. उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा कि उनके पास अगर कोई सुझाव हैं, तो वह लिखकर दे सकते हैं.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘अगर न्यायपालिका में सुधार का मामला है तो मैं कोर्ट कचहरी में नहीं आने दूंगा किसी को, पहले लिखकर दो कि क्या है, मैं देखूंगा अगर हो सकता है या नहीं, हम बैठे हैं सारे लोग, हम करेंगे.
याचिकाकर्ता ने खुद यह याचिका दाखिल की है. सीजेआई सूर्यकांत ने उनसे कहा, ‘आप देश का बदलाव चाहते हैं ना, तो आपको ऐसी याचिका डालने की जरूरत नहीं है आप एक पत्र लिखकर मुझे भेज दीजिए.’ सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘यह याचिका याचिकाकर्ता ने खुद दाखिल की है और इसमें न्यायपालिका में कई सुधारों और कुछ अदालती मामलों की जांच की मांग की गई है. दो अलग मामलों को इसमें मिला दिया गया है.’
यह पीआईएल कमलेश त्रिपाठी नाम के शख्स ने दाखिल की थी और खुद ही अपनी याचिका की पैरवी कर रहे थे. कमलेश त्रिपाठी ने सुनवाई के दौरान अनुरोध किया कि वह अपनी दलीलें हिंदी में पेश करना चाहते हैं. ‘देश में बदलाव लाने’ की अर्जी पर जवाब में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की आकांक्षाओं के लिए औपचारिक याचिका उचित रास्ता नहीं है.



