ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत में अनधिकृत व्यक्तियों की तरफ से विशेष समुदाय से भारतीय नागरिकता का प्रमाण मांगने को गलत करार दिया. ओवैसी ने कहा कि इन लोगों को नागरिकता का प्रमाण पूछने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने जनता को सलाह दी कि वह ऐसे लोगों से बात न करे.
असदुद्दीन ओवैसी ने आगाह किया कि बिना किसी आधार के हर किसी पर बांग्लादेशी होने का ठप्पा लगाना न केवल भारत के सामरिक हितों के लिए चिंताजनक है बल्कि यह पड़ोसी देश की जनता को अनावश्यक रूप से उकसाने जैसा आत्मघाती कदम होगा. इससे देश में और अशांति बढ़ेगी.
‘पड़ोसी देश के प्रति बयानबाजी में सावधानी जरूरी’
एआईएमआईएम नेता ओवैसी का मुख्य जोर भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर रहा. उन्होंने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पड़ोसी देश के प्रति बयानबाजी में सावधानी बरतनी चाहिए. ओवैसी ने तर्क दिया कि बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह वहां की ‘जनता का रिवोल्यूशन’ (जनक्रांति) है. उन्होंने जोर देकर कहा कि एक स्थिर बांग्लादेश, भारत विशेषकर उत्तर-पूर्वी राज्यों (North-East) की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
बांग्लादेश में अस्थिरता से भारत को नुकसान
ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में अस्थिरता बनी रहती है तो इसका फायदा पाकिस्तान की आईएसआई (ISI) और चीन जैसी ताकतें उठा सकती हैं, जो भारत के हितों के खिलाफ काम करती हैं. उन्होंने कहा कि हमें देशहित में सोचना होगा. भारत और बांग्लादेश के बीच हजारों किलोमीटर की लंबी ज़मीनी और समुद्री सीमा है. किसी भी प्रकार की अस्थिरता हमारी सीमाओं की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है.
AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर देश की बाहरी सुरक्षा और आंतरिक नियमों के पालन पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है.
ये भी पढ़ें



