बीएमसी चुनाव 2026 मुंबई की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है. इस चुनाव का नतीजा शुक्रवार (16 जनवरी 2026) को सामने आने वाले हैं. बता दें कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका का बजट हजारों करोड़ रुपये का होता है, जिससे मुंबई शहर के विकास से जुड़े बड़े फैसले लिए जाते हैं. बीएमसी चुनाव 2026 में उम्मीदवारों की संपत्ति एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है. चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामों में कई उम्मीदवारों ने करोड़ों रुपये की संपत्ति घोषित की है. इससे धनबल और राजनीति के रिश्ते पर बहस तेज हो गई है. इसमें सबसे चर्चित नाम मकरंद नार्वेकर का है, जो भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं. वे वार्ड नंबर 226 से चुनाव लड़ रहे हैं और यह उनका लगातार तीसरा बीएमसी चुनाव है. वे महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के छोटे भाई हैं. उनकी उम्र 47 वर्ष है.
मकरंद नार्वेकर ने अपने चुनावी हलफनामे में कुल 124.4 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है. इस आंकड़े के आधार पर वे बीएमसी चुनाव 2026 के सबसे अमीर उम्मीदवारों में गिने जा रहे हैं. उनकी संपत्ति को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा लगातार बढ़ रही है. हैरानी की बात ये है कि 2012 में मकरंद नार्वेकर की संपत्ति 3.67 करोड़ थी. साल 2017 में ये 6.32 करोड़ थी. वही साल 2026 में आंकड़ा 124 करोड़ हो गया. इस तरह से महज 14 सालों उनकी संपत्ति में 1900 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
मकरंद नार्वेकर की चल-अचल संपत्ति
मकरंद नार्वेकर की तरफ से घोषित विवरण के अनुसार उनकी चल संपत्ति 32.14 करोड़ रुपये है, जबकि अचल संपत्ति का मूल्य 92.32 करोड़ रुपये बताया गया है. उनके ऊपर 16.68 करोड़ रुपये की देनदारियां भी दर्ज हैं. वित्त वर्ष 2025–26 में उनकी कुल आय 2.77 करोड़ रुपये बताई गई है. मकरंद नार्वेकर की अचल संपत्ति का बड़ा हिस्सा रायगढ़ जिले के अलीबाग क्षेत्र में स्थित है. उन्होंने अक्टूबर 2022 से नवंबर 2025 के बीच अलीबाग में 27 कृषि भूमि प्लॉट खरीदे हैं. अलीबाग को हाल के वर्षों में हाई-वैल्यू रियल एस्टेट क्षेत्र माना जाने लगा है, जिससे जमीन की कीमतों में तेजी आई है.
अलीबाग के अलावा उन्होंने अक्टूबर 2021 में दक्षिण मुंबई के कोलाबा इलाके में एक फ्लैट खरीदा था. इस फ्लैट की कीमत 7.99 करोड़ रुपये बताई गई है. कोलाबा मुंबई के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित इलाकों में शामिल है. नार्वेकर परिवार की कुल संपत्ति भी चर्चा में रही है. परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा घोषित संपत्ति में 2017 के बाद बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है. यह बढ़ोतरी राजनीतिक हलकों में सवाल और बहस का कारण बनी हुई है.



