ईरान में चलते तनाव के कारण भारत ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने सलाह दी है. तेहरान में भारतीय छात्रा अयमन फातिमा की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इस पर हैदराबाद के सांसद और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने विदेश मंत्रालय को एक आपातकालीन संदेश भेजकर सूचित किया कि अयमन तेहरान में फंसी हुई है और उसका अपने परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है. ओवैसी ने इस मामले को अति गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार से छात्रा के तत्काल रेस्क्यू की मांग की है.
तेहरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही फातिमा
तेहरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही अयमन फातिमा के बारे में मिली जानकारी चौंकाने वाली है. बताया जा रहा है कि छात्रा का पासपोर्ट वहां के विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने पास रख लिया है, जिसकी वजह से वह कानूनी तौर पर देश छोड़ने में असमर्थ है. अयमन के पिता वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में हैं और वे अपनी बेटी से संपर्क न हो पाने के कारण गहरे मानसिक तनाव में हैं.
ओवैसी ने एक्स पर किया पोस्ट
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर छात्रा की सटीक लोकेशन और संपर्क नंबर शेयर करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से त्वरित कार्रवाई का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि किसी विदेशी संस्थान की ओर से भारतीय नागरिक का पासपोर्ट जब्त करना न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रोटोकॉल के खिलाफ भी है.
Sir @DrSJaishankar request your urgent attention to evacuate this Indian student (Ayman Fatima) stranded in Tehran, Iran. Her passport is with the university authorities, there’s been no contact with her family and her father is in the UAE presently. Kindly intervene at the… https://t.co/M0BLXCKYlF
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) January 14, 2026
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान में आंतरिक विरोध प्रदर्शन और इजरायल के साथ जारी सैन्य तनाव के कारण स्थिति बेहद अस्थिर है. पिछले कुछ हफ्तों में तेहरान से कई भारतीय छात्रों ने वीडियो संदेश भेजकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई थी. हालांकि, मेडिकल संगठनों (AIMSA) ने पहले छात्रों की सुरक्षा का आश्वासन दिया था, लेकिन अयमन फातिमा का मामला लापता और दस्तावेज जब्ती के कारण अधिक संवेदनशील हो गया है.
ईरान में इंटरनेट और संचार सेवाओं में बाधा
ईरान में इंटरनेट और संचार सेवाओं की बाधा के बीच एक-एक पल कीमती है. यदि विश्वविद्यालय प्रशासन पासपोर्ट वापस नहीं कर रहा है, तो यह तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की जिम्मेदारी है कि वह स्थानीय अधिकारियों पर दबाव बनाए. असदुद्दीन ओवैसी की इस पहल ने एक बार फिर विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा के मुद्दे को मुख्यधारा की बहस में ला दिया है. अब देखना यह है कि विदेश मंत्रालय इस रेस्क्यू कॉल पर कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देता है.
यह भी पढ़ेंः ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में आप कितना जानते हैं, जानें परिवार में कौन-कौन?



