तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने राज्य के समावेशी विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने आगामी नगर निगम चुनावों में प्रत्येक नगर निगम में कम से कम एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ‘को-ऑप्शन’ सदस्य (कॉर्पोरेटर) के रूप में नामित करने का प्रस्ताव रखा है. इस पहल का उद्देश्य समाज के सबसे उपेक्षित वर्ग को मुख्यधारा की राजनीति और विधायी प्रक्रियाओं में सीधी भागीदारी देना है, ताकि वे अपनी समस्याओं को स्वयं सदन में उठा सकें.
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने राजधानी हैदराबाद में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के मंच से अपने कैबिनेट सहयोगियों और प्रशासन को संबोधित करते हुए कहा, ‘अक्सर ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याओं पर दूसरे लोग चर्चा करते हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि वे खुद अपने अधिकारों और चुनौतियों के बारे में बात करें.’ उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार अल्पसंख्यक समुदायों को जिला परिषदों और नगर पालिकाओं में प्रतिनिधित्व देने के लिए ‘को-ऑप्शन’ सदस्य के रूप में नामांकित किया जाता है, ठीक उसी तर्ज पर अब ट्रांसजेंडरों को भी यह अधिकार दिया जाएगा.
सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान की दृष्टि से देखती है- रेड्डी
मुख्यमंत्री ने इस निर्णय के पीछे के मानवीय दृष्टिकोण को साझा करते हुए कहा, ‘यह सिर्फ एक राजनीतिक पद नहीं है, बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय को यह अहसास दिलाने की कोशिश है कि सरकार उन्हें सम्मान और मानवता की दृष्टि से देखती है. वे भी इस समाज का अभिन्न अंग हैं और उन्हें पुरुषों और महिलाओं के समान अवसर मिलने चाहिए. इस कदम से न सिर्फ इस समुदाय का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय प्रशासन में उनकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित होने से उनके जीवन स्तर में सुधार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.’
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने यह संकेत भी दिया कि वह इस प्रस्ताव को आगामी कैबिनेट बैठक में औपचारिक चर्चा के लिए रखेंगे. अगर कैबिनेट इस पर अपनी सहमति दे देती है, तो तेलंगाना भारत के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां ट्रांसजेंडर समुदाय को स्थानीय निकाय शासन में इस स्तर का विधायी प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा.
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