प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने के लिए शनिवार को सोमनाथ पहुंचे. प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए देश भर से आए भक्तों में अनोखा उत्साह देखने को मिला. ड्रोन शो में सोमनाथ के साहस, स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया. इस दौरान पीएम मोदी ने रविवार (11 जनवरी) को सोमनाथ में एक कार्यक्रम को संबोधित किया.
पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित करते हुए कहा, ‘महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक हमले कर रहे थे लेकिन वो भूल गए थे कि सोमनाथ के नाम में सोम यानी अमृत है. ऐसे में जब जब इसे नष्ट करने की कोशिश हुई तो साेमनाथ मंदिर उठ खड़ हुआ. पीएम मोदी ने कहा कि मजहबी आततायी इतिहास के पन्नों में सिमट गए तो वहीं साेमनाथ मंदिर आज भी स्वाभिमान से खड़ा है.’
‘एक हजार साल बाद भी सोमनाथ मंदिर खड़ा’
उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले, इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा. आप जो यहां उपस्थित हैं, उनके पुरखों ने हमारे पुरखों ने जान की बाज़ी लगा दी थी. अपनी आस्था के लिए अपने विश्वास के लिए और अपने महादेव के लिए उन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि हजार साल पहले वे आततायी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन आज एक हजार साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है.
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— ABP News (@ABPNews) January 11, 2026
बिना नाम लिए विपक्ष पर निशाना
पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का इतिहास नहीं है बल्कि ये इतिहास विजय और पुनर्निर्माण का है. भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्य स्थल हैं. ये स्थल हमारे सामर्थ्य, प्रतिरोध और परंपरा के पर्याय रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य से आज़ादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने इनसे पल्ला झाड़ने का कोशिश की. उस इतिहास को भुलाने के कुत्सित प्रयास किए गए.
‘देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद है’
पीएम मोदी ने कहा कि मैंने देखा कल रात 1,000 ड्रोन द्वारा वैदिक गुरुकुलों के 1,000 विद्यार्थियों की उपस्थिति और सोमनाथ के 1,000 वर्षों की गाथा का प्रदर्शन किया गया और आज 108 अश्वों के साथ मंदिर तक शौर्य यात्रा, मंत्रों और भजनों की अद्भुत प्रस्तुति ये सब कुछ मंत्र-मुग्ध कर देने वाला है. उन्होंने कहा कि इस आयोजन में गर्व है, गरिमा है, गौरव है और इसमें गरिमा का ज्ञान भी है. इसमें वैभव की विरासत है, इसमें अध्यात्म की अनुभूति है. आनंद है. आत्मीयता है और देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद है.
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