बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से मोहम्मद यूनुस के नेतृ्त्व वाली अंतरिम सरकार के राज में हिंदुओं पर खूब अत्याचार हो रहे हैं. भारत ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को बांग्लादेश से कहा कि वह अपने यहां हो रहीं सांप्रदायिक घटनाओं पर सख्ती से अंकुश लगाए. बांग्लादेश में पिछले कुछ हफ्तों में कई हिंदूओं की हत्या और महिलाओं के साथ दरिंदगी किए जाने की घटनाओं के बाद भारत ने यह बयान जारी किया है.
सांप्रदायिक घटनाओं से सख्ती से निपटे बांग्लादेश: MEA
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हम अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर चरमपंथियों द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों का चिंताजनक सिलसिला देख रहे हैं. इस तरह की सांप्रदायिक घटनाओं से तुरंत और सख्ती से निपटना जरूरी है. हमने इस तरह की घटनाओं को व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक मतभेदों या बाहरी कारणों से जोड़ने की एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखी है.’ उन्होंने कहा, ‘इस तरह की अनदेखी से अपराधियों का हौसला बढ़ता है और अल्पसंख्यकों के बीच डर और असुरक्षा की भावना गहरी हो जाती है.’
बांग्लादेश में चुनाव से पहले सांप्रदायिक हिंसा बढ़ी
बांग्लादेश में आम चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं. पिछले साल हुए तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार सामान्य माहौल स्थापित करने में नाकाम रही है. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने कहा है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों की नींव इतनी मजबूत है कि मौजूदा कठिन दौर को भी झेल लेगी.
भारत-बांग्लादेश संबंधों में बढ़ा तनाव
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों और भारतीय राजनयिक मिशनों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ा है. देश में 12 फरवरी को चुनाव प्रस्तावित हैं, लेकिन सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और राजनीतिक दलों के बीच टकराव भी बढ़ रहा है. भारत ने बांग्लादेश में फैलाए जा रहे कथित ‘भारत-विरोधी झूठे नैरेटिव’ को भी खारिज करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सुरक्षा सुनिश्चित करना यूनुस सरकार की जिम्मेदारी है.



