Thursday, February 12, 2026
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‘उमर खालिद मेरा गुरु नहीं है’, सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद दिल्ली की अदालत में शरजील इमाम की दलील

8 जनवरी 2026 को दिल्ली के कड़कड़डुमा कोर्ट में 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश केस में आरोपी शरजील इमाम की तरफ से दलीलें पेश की गईं. उनके वकील अहमद इब्राहिम ने कोर्ट में कहा कि शरजील के खिलाफ कोई साजिश साबित नहीं हुई है और इस मामले में कोई साजिश का केस नहीं बना है.

साजिश के लिए मन की सहमति जरूरी

कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने आरोप तय करने पर बहस सुनी. शरजील इमाम के वकील ने तर्क दिया कि साजिश के लिए ‘मन की सहमति’ जरूरी है, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं है. उन्होंने कहा कि चार्जशीट में शामिल व्हाट्सएप चैट्स में शरजील का कोई कनेक्शन नहीं है. कोई फोन कॉल या चैट नहीं जो उन्हें सह-आरोपियों से जोड़े.

शरजील ने अदालत में सफाई देते हुए कहा, ‘पुलिस का आरोप सरासर गलत है कि उमर खालिद मेरा मेंटोर था. उमर खालिद मेरा गुरु नहीं है.’

शरजील इमाम के हक में क्या दलीलें दी गईं?

  • पूरा केस व्हाट्सएप चैट्स पर आधारित है, लेकिन शरजील किसी भी चैट से जुड़े नहीं हैं.
  • शरजील का दंगों में कोई सीधा हाथ नहीं था, उन्हें सिर्फ साजिश रचने के आरोप में शामिल किया गया है.
  • उन्होंने CAA के खिलाफ पर्चे बांटे थे, लेकिन यह भेदभाव के खिलाफ था.
  • 13 दिसंबर 2019 को दिया भाषण 15 दिसंबर की हिंसा से जुड़ा नहीं है.
  • शाहीन बाग विरोध स्थल छोड़ने के बाद कोई हिंसा नहीं हुई.
  • 3 जनवरी से 13 जनवरी तक कोई विरोध स्थल पर नहीं गए, फिर अलीगढ़, पश्चिम बंगाल और बिहार में भाषण दिए जहां कोई हिंसा नहीं हुई.
  • 28 जनवरी 2020 से जेल में हैं, इसलिए ट्रंप के भारत दौरे (फरवरी 2020) से जुड़ी कोई प्लानिंग में शामिल नहीं.
  • कोई मीटिंग या चर्चा में हिस्सा नहीं लिया जो हिंसा की ओर ले जाए.
  • पुलिस ने सितंबर 2019 की एक मीटिंग का फोटो दिखाया, लेकिन शरजील ने उमर खालिद से कभी बात नहीं की.
  • साजिश के लिए हिंसा का जिक्र जरूरी है, लेकिन उनके भाषणों में ऐसा कुछ नहीं.
  • कोई चैट या कॉल हिंसा या साजिश से जुड़ी नहीं मिली है.

वकील ने अहमद इब्राहिम ने कहा, ‘साजिश के लिए सहमति जरूरी है, सिर्फ चर्चा काफी नहीं.’ उन्होंने कोर्ट को बताया कि शरजील को ‘टॉप कॉन्सपिरेटर’ भी नहीं कहा गया है.

6 सालों से जेल में कैद हैं शरजील इमाम
  
यह केस 2020 के उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए. दंगे CAA-NRC विरोध के दौरान हुए थे. पुलिस का आरोप है कि यह एक बड़ी साजिश थी, जिसमें उमर खालिद समेत कई लोग शामिल थे.

शरजील इमाम को अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) के तहत आरोपी बनाया गया है. शरजील 28 जनवरी 2020 से जेल में हैं. हाल ही में 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी और उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन अन्य 5 आरोपियों को जमानत दे दी.

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