आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आमतौर पर इंसानों से जुड़े मामलों में भी इतनी याचिकाएं दाखिल नहीं की जाती है. मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में उसके समक्ष दायर किए जा रहे अंतरिम आवेदनों की संख्या पर संज्ञान लेते हुए यह बात कही है. दो एडवोकेट ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने आवारा कुत्तों का मामला उठाया.
वकील ने बेंच को बताया कि उन्होंने इस मामले में एक अंतरिम याचिका दायर की है, जिस पर जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, ‘इंसानों से जुड़े मामलों में भी आमतौर पर इतनी अधिक संख्या में याचिकाएं नहीं आतीं.’ कोर्ट ने वकील से कहा कि बुधवार को आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई होनी है. एक और वकील ने इस मामले में ट्रांसफर पेटीशन का जिक्र किया तो बेंच ने कहा कि बुधवार को कई याचिकाओं पर सुनवाई होगी और पीठ सभी वकीलों की बात सुनेगी.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच इस मामले में सुनवाई करने वाली है. नवंबर में कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे पब्लिक प्लेस में कुत्तों के काटने के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई थी. कोर्ट ने निर्देश दिया था कि आवारा कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित कर दिया जाए और पकड़े गए आवारा कुत्तों को उस स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था.
कोर्ट ने अधिकारियों को राज्य राजमार्गों, नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने का भी निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा कि खेल परिसरों सहित संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं की पुनरावृत्ति न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि इन परिसरों को रोके जा सकने वाले खतरों से सुरक्षित करने में प्रणालीगत विफलता को भी उजागर करती है.
कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कई निर्देश जारी किए थे. कोर्ट दिल्ली एनसीआर में आवारा कुत्तों के काटने से, विशेष रूप से बच्चों में, रेबीज फैलने की मीडिया रिपोर्ट के संबंध में पिछले साल 28 जुलाई को शुरू किए गए स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है.
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