तेलंगाना विधानसभा में AIMIM के विधायक और सदन के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर अपने मुखर तेवरों से सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. मतदाता सूची और नागरिकों के मताधिकार पर चर्चा के दौरान ओवैसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत किसी की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह हर उस नागरिक का है, जो यहां पैदा हुआ है और यहां की मिट्टी से जुड़ा है.
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान अकबरुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में विसंगतियों का मुद्दा उठाया. उन्होंने सरकार से मांग की कि किसी भी पात्र मतदाता को उसके वोट के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.
विधानसभा में तीखा बयान देते हुए बोले अकबरुद्दीन ओवैसी
AIMIM विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘जो भी इस मुल्क का शहरी है और वोट देने के लिए पात्र है, उसके हक को छीना नहीं जाना चाहिए. हम यह नहीं कह रहे कि किसी पाकिस्तानी या बांग्लादेशी को वोट का अधिकार दें, लेकिन एक भारतीय नागरिक का नाम सूची से हटाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’
अपने संबोधन में ओवैसी ने बिहार में हुई एक पुरानी जांच का हवाला देते हुए कहा कि वहां एक भी मुस्लिम ऐसा नहीं पाया गया, जो विदेशी मूल का हो. उन्होंने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार देते हुए कहा कि हिंदू-मुसलमान के नाम पर नफरत फैलाना और लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाना गलत है.
वोटर लिस्ट के SIR के दौरान बरती जाए पूरी पारदर्शिता- ओवैसी
उन्होंने तीखे लहजे में कहा, ‘यह मुल्क सबका है. यह हिंदू का है, मुसलमान का है, ईसाई का है, पारसी का है और उनका भी है जो किसी भगवान को नहीं मानते. कोई भी इस देश का अकेला ठेकेदार नहीं है. यह मुल्क किसी के बाप की जागीर नहीं है कि वह जैसे चाहे वैसे चलाए.’
ओवैसी ने तेलंगाना सरकार और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) के दौरान पूरी पारदर्शिता बरती जाए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुसलमान इस देश का अभिन्न हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे. उनकी वफादारी पर सवाल उठाना न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि देश की एकता के खिलाफ भी है.
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